July 21, 2026
Skin Care

SPF, PA और PPD क्या है? सनस्क्रीन खरीदने से पहले जानिए ये जरूरी फर्क

अगर आप सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन खरीदते हैं, तो हो सकता है कि आपकी त्वचा को पूरी सुरक्षा न मिल रही हो। जानिए PPD क्यों है आपकी स्किन के लिए बेहद जरूरी।

क्या आप भी सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन खरीदते हैं? पहले जानिए PPD का महत्व

आजकल लगभग हर व्यक्ति जानता है कि धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। सनस्क्रीन खरीदते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले SPF देखते हैं। कुछ लोग PA++++ भी चेक करने लगे हैं। लेकिन अब एक नया शब्द तेजी से चर्चा में है—PPD

आखिर PPD क्या है? क्या यह PA से अलग है? और क्या इसे जानना सच में जरूरी है?

अगर आपकी सबसे बड़ी स्किन प्रॉब्लम टैनिंग, पिग्मेंटेशन, मेलाज़्मा या चेहरे पर काले धब्बे हैं, तो इसका जवाब है—हाँ, बिल्कुल। आइए आसान भाषा में समझते हैं।

SPF क्या होता है?

SPF का पूरा नाम Sun Protection Factor है।

यह बताता है कि आपकी सनस्क्रीन UVB किरणों से त्वचा की कितनी सुरक्षा करती है।

UVB किरणें मुख्य रूप से इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार होती हैं—

  • सनबर्न (त्वचा का जलना)
  • त्वचा का लाल होना
  • धूप से होने वाला नुकसान
  • लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा को नुकसान

यानी SPF जितना अच्छा होगा, UVB किरणों से सुरक्षा उतनी बेहतर होगी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

UVA किरणें क्यों ज्यादा चिंता का विषय हैं?

सूरज की UVA किरणें त्वचा की गहराई तक पहुंचती हैं और धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती हैं।

इन्हीं किरणों के कारण हो सकती हैं—

  • टैनिंग
  • पिग्मेंटेशन
  • मेलाज़्मा
  • काले धब्बे
  • समय से पहले झुर्रियां
  • त्वचा की चमक कम होना
  • समय से पहले एजिंग

भारतीय त्वचा में अक्सर यही समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं।

इसीलिए UVA से सुरक्षा बेहद जरूरी है।

PA क्या होता है?

PA का मतलब है Protection Grade of UVA

सनस्क्रीन पर आपको अक्सर यह लिखा दिखाई देगा—

  • PA+
  • PA++
  • PA+++
  • PA++++

जितने ज्यादा ‘+’ होंगे, UVA से सुरक्षा उतनी बेहतर मानी जाती है।

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है।

क्या सिर्फ PA++++ काफी है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर सनस्क्रीन पर PA++++ लिखा है तो वही सबसे बेहतर विकल्प है।

लेकिन सच यह है कि PA++++ सिर्फ सुरक्षा की एक श्रेणी (Category) बताता है, उसकी वास्तविक क्षमता नहीं।

उदाहरण के लिए—

  • किसी सनस्क्रीन का PPD 16 हो सकता है।
  • दूसरे का PPD 30 हो सकता है।
  • तीसरे का PPD 40 हो सकता है।

फिर भी तीनों पर PA++++ लिखा हो सकता है।

यानी PA आपको केवल एक ग्रेड बताता है, जबकि PPD वास्तविक UVA सुरक्षा का स्तर बताता है।

PPD क्या होता है?

PPD का पूरा नाम है Persistent Pigment Darkening

यह मापता है कि आपकी सनस्क्रीन UVA किरणों से कितनी प्रभावी सुरक्षा देती है।

जितना अधिक PPD होगा, उतनी ही बेहतर सुरक्षा आपकी त्वचा को टैनिंग, पिग्मेंटेशन और धूप से होने वाले लंबे समय के नुकसान से मिल सकती है।

भारतीय त्वचा के लिए PPD क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय त्वचा में अक्सर ये समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं—

  • जल्दी टैन होना
  • पिग्मेंटेशन
  • मेलाज़्मा
  • मुंहासों के बाद काले निशान
  • असमान स्किन टोन

इन सभी समस्याओं में UVA किरणों की बड़ी भूमिका होती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि UVA किरणें बादलों और कांच के आर-पार भी पहुंच सकती हैं। इसलिए केवल धूप वाले दिनों में ही नहीं, बल्कि रोजाना भी त्वचा को इनसे बचाना जरूरी है।

सही सनस्क्रीन कैसे चुनें?

सनस्क्रीन खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें—

✔️ SPF 30 या SPF 50

✔️ Broad Spectrum Protection

✔️ PA++++

✔️ यदि उपलब्ध हो, तो PPD वैल्यू भी देखें

अगर आपका मुख्य लक्ष्य टैनिंग और पिग्मेंटेशन से बचाव है, तो अच्छी UVA सुरक्षा वाला सनस्क्रीन चुनना समझदारी होगी।

सनस्क्रीन लगाने के जरूरी टिप्स

  • रोज सुबह सनस्क्रीन लगाएं।
  • चेहरे, गर्दन और खुले हिस्सों पर पर्याप्त मात्रा में लगाएं।
  • अगर आप बाहर हैं, तो हर 2–3 घंटे में दोबारा लगाएं।
  • कान, गर्दन और हाथों को भी न भूलें।
  • टोपी और सनग्लासेस जैसी अतिरिक्त सुरक्षा भी अपनाएं।

सनस्क्रीन चुनते समय केवल SPF देखना पर्याप्त नहीं है। SPF जहां UVB किरणों से सुरक्षा देता है, वहीं PA और PPD UVA किरणों से सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हैं, जो टैनिंग, पिग्मेंटेशन, मेलाज़्मा और समय से पहले त्वचा बूढ़ी दिखने जैसी समस्याओं का मुख्य कारण बन सकती हैं।

अगली बार जब आप सनस्क्रीन खरीदें, तो सिर्फ SPF पर न रुकें। यदि उपलब्ध हो, तो PPD वैल्यू भी जरूर देखें। सही जानकारी के साथ चुनी गई सनस्क्रीन आपकी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ, सुरक्षित और निखरी हुई बनाए रखने में मदद कर सकती है।

ध्यान दें: PPD सभी सनस्क्रीन ब्रांड्स पर अनिवार्य रूप से नहीं लिखा होता और अलग-अलग देशों में लेबलिंग के नियम अलग हो सकते हैं। यदि आपको मेलाज़्मा, गंभीर पिग्मेंटेशन या अन्य त्वचा संबंधी समस्या है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।