Home Uncategorized नेहा बघेल ने ट्रायथलॉन ओलंपिक में एनडीटीसी 2017 का खिताब जीता

नेहा बघेल ने ट्रायथलॉन ओलंपिक में एनडीटीसी 2017 का खिताब जीता

Neha Baghel Pic / Photo Courtesy : facebook / Neha Baghel
Ashu Das
भारत में नारी आज कदम से कदम मिलाकर चल रही है। आज भारतीय महिलाएं राजनीति, खेल, मनोरंजन हर जगह अपना परचम लहरा चुकी हैं। देश दुनिया में महिलाओं का बोलबाला है। आज हम आपको मिलाने जा रहे हैं भारत की एक ऐसी ही खिलाड़ी से जिनका नाम है नेहा बघेल। नेहा बघेल ने ट्रायथलॉन ओलंपिक में दूसरी बार एनडीटीसी 2017 (न्यू दिल्ली ट्रायथलन चैंपियनशिप 2017) का खिताब जीता ।
एक साधारण परिवार में जन्मी नेहा यहां तक पहुंचने के लिए जितना संघर्ष किया है कर रही है उसे जानने के बाद आप भी इस नारी शक्ति की मिसाल को सलाम करेंगे।
नेहा के संघर्ष और सफर के बारे में बात करते हुए उनके कोच त्रिभुवन राम नारायण ने सिटी वुमन से बातचीत के दौरान कहा कि वो भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जो ट्राइथलॉन को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। नेहा के कोच ने बताया कि वो मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर से ताल्लुकात रखती हैं। लेकिन करियर को मुकाम देने के लिए उन्हें दिल्ली का रूख करना पड़ा।
नेहा की मेहनत की तारीफ करते हुए उनके कोच ने कहा कि उन्होंने बिना किसी मदद के साउथ एशिया गेम्स 2016 में सातवां स्थान प्राप्त किया था। नेहा वर्तमान समय में साल 2018 में होने वाले नेशनल गेम्स के लिए तैयारी कर रही हैं ताकि राज्य की बजाय राष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर दिखा सकें।
सिटी वुमन से बातचीत के दौरान नेहा के कोच ने बताया कि वो 4 बार मध्यप्रदेश की चैम्पियन रह चुकी हैं और आगे भी इस मुकाम को बरकरार रखने के लिए मेहनत कर रही हैं। नेहा के जज्बे को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सराहा जा चुका है। मप्र खेल एवं युथ वेलफेयर डिपार्टमेंट के निर्देश पर ग्वालियर में मप्र ट्रायथलॉन टीम का विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाया था, जिसमें सचिन पाल को मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। इसके बाद मप्र स्विमिंग टीम से महिलाओं ने नेशनल गेम्स में ब्रोंज मेडल जीता। महिलाओं की इस उपलब्धि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ग्वालियर की नेहा बघेल को एक लाख 20 हजार रुपए का चेक प्रदान कर सम्मानित किया था।
नेहा देश के गौरव में चार चांद लगाने के लिए लगातार परिश्रम कर रही हैं, लेकिन सेहत उनके आगे चुनौती बनी हुई है। नेहा के कोच का कहना है कि एक खिलाड़ी को जितने नुट्रिशयस फ़ूड की ज़रूरत होती है। उतना नुट्रिशयस फ़ूड नेहा को मिल सके इसके लिए वो लगातार कोशिशें कर रहे हैं, वो अपनी कमाई और स्कॉलरशिप का एक हिस्सा नेहा पर लगा रहे हैं ताकि वो देश का नाम रोशन कर सकें।
हमारे समाज में नेहा जैसी कई लड़कियां है जो अपने हौंसलों से ऊंचाइयों को छूना चाहती है और छू भी रही हैं। नेहा उन सभी के लिए ना सिर्फ एक आदर्श है बल्कि संघर्ष की वो कहानी है जो हर परिस्थिति में लड़ना जानती है।
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