
ओटीटी की दुनिया में जब कोई कलाकार अपने अभिनय से चौंकाता है, तो दर्शक उसके पूरे सफ़र को जानना चाहते हैं। हालिया ओटीटी प्रोजेक्ट ‘तस्करी’ में जोया अफ़रोज़ की दमदार परफॉर्मेंस ने यही काम किया है। एक सशक्त, रहस्यमय और भावनात्मक किरदार में नज़र आईं जोया ने साबित कर दिया कि वह केवल खूबसूरती नहीं, बल्कि गहराई और दमदार अभिनय का भी नाम हैं।
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तस्करी में जोया अफ़रोज़ का किरदार कहानी की आत्मा की तरह सामने आता है। उनका अभिनय न तो ओवरड्रामैटिक है और न ही बनावटी। आंखों के एक्सप्रेशन से भावनाएँ बयां करना, सधी हुई डायलॉग डिलीवरी, स्क्रीन पर आत्मविश्वास और पकड़, किरदार के दर्द, मजबूती और संघर्ष को सच्चाई से दिखाना। यह भूमिका जोया के करियर में एक अहम मोड़ साबित होती है।
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जोया अफ़रोज़ का जन्म और पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने आर. एन. शाह हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद मिथिबाई कॉलेज, मुंबई से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ उनका झुकाव बचपन से ही अभिनय की ओर था।
बाल कलाकार से टीवी फेवरेट तक
जोया ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत महज़ छोटी उम्र में टेलीविज़न सीरीज़ ‘कोरा काग़ज़’ (1998) से की। इसके बाद उन्होंने सुपरहिट फ़िल्म ‘हम साथ–साथ हैं’ (1999) में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
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उन्होंने मन – सोल्स हार्ट, कुछ ना कहो, हम साथ साथ है और फ्रॉम टिया विद लव जैसी फ़िल्मों में भी बाल कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। टीवी पर ‘सोन परी’ में फ्रूटी की दोस्त का किरदार आज भी दर्शकों की यादों में बसा हुआ है। वहीं, ‘जय माता की’ में देवी पार्वती के रूप में उन्होंने एक गंभीर और आध्यात्मिक छवि प्रस्तुत की।
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बॉलीवुड, पंजाबी और रीजनल सिनेमा में कदम
वयस्क अभिनेत्री के रूप में जोया ने ‘द एक्सपोज़’ (2014) से बॉलीवुड में एंट्री की। इस फ़िल्म में उनका ग्लैमरस और आत्मविश्वास से भरा अवतार चर्चा में रहा।
इसके बाद वह स्वीटी वेड्स एनआरआई, कॉन्टैक्ट किलर, कबाड़ – द कॉइन, जैसी फ़िल्मों में नज़र आईं। उन्होंने 17 साल की उम्र में पंजाबी फ़िल्म ‘साडी गली आया करो’ और तमिल सिनेमा में भी काम कर अपनी वर्सेटिलिटी साबित की।
ओटीटी की दुनिया में मज़बूत पहचान
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मत्स्य कांड (MX Player) से ओटीटी में कदम रखने के बाद, ज़ी5 की सीरीज़ ‘मुख़बिर: द स्टोरी ऑफ़ ए स्पाई’ में जमिला का किरदार उनके करियर का अहम पड़ाव बना। तस्करी के साथ उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म उनके अभिनय को नया विस्तार दे रहा है।
ब्यूटी क्वीन से इंटरनेशनल मंच तक
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जोया अफ़रोज़ ने फेमिना मिस इंडिया 2013 में सेकंड रनर-अप रहकर राष्ट्रीय पहचान बनाई और मिस इंडिया इंटरनेशनल 2013 का खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने मिस इंटरनेशनल 2022 (जापान) में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
सम्मान और उपलब्धियाँ
भारत रत्न डॉ. अंबेडकर अवॉर्ड्स – ब्यूटी क्वीन ऑफ़ द ईयर (2013)
लाइफ़ ओके स्क्रीन अवॉर्ड्स – बेस्ट एक्ट्रेस (द एक्सपोज़)
तस्करी से शुरू हुई यह कहानी दरअसल उस कलाकार की है, जिसने बचपन से लेकर आज तक खुद को लगातार साबित किया है। जोया अफ़रोज़ आज सिर्फ़ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि ओटीटी दौर की एक मज़बूत और भरोसेमंद परफॉर्मर बन चुकी हैं।










