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पूर्णिमा देवी बर्मन – ग्रीन ऑस्कर विजेता

साल 2017 में Whitley अवार्ड से नवाजा गया। इस अवॉर्ड का दूसरा नाम ग्रीन ऑस्कर भी है। आज पूर्णिमा देवी बर्मन 200 महिलाओं का सेल्फ हेल्प ग्रुप को चला रही हैं। इस ग्रुप का नाम है हरगिला आर्मी।
Purnima Devi Barman twitter/DeviBarman

पूर्णिमा देवी बर्मन का जन्म आसाम के छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता सेना में थे। उनका ज्यादातर बचपन अकेले में ही बीता था। शायद इसी कारण उन्हें प्रकृति से काफी प्रेम है। जब वे अकेले रहती थी तो, वे कुदरत से बातें किया करती थी।

 

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उनका कहना है कि आसमान में राजा की तरह उड़ने वाले गिद्धों और सरसों के खेत में जानवरों की लाशों को खाते हुए देखना वह कैसे भूल सकती हैं। वे बताती है कि उनकी दादी उन पक्षियों को स्थानीय नाम से पुकारा करती थी। यह तो उन्हें भी नहीं पता था कि आगे चलकर वे पक्षियों के लिए कुछ करने वाली है।

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे वे बड़ी होती गई, जीव विज्ञान में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। इसलिए उन्होंने इसी विषय में अपनी पढ़ाई को जारी रखा और उसी समय पर इन्होंने इस बात का फैसला कर लिया कि वे आगे चलकर अपने ज्ञान को प्रकृति के लिए ही इस्तेमाल करेंगी। उन्होंने गुवाहाटी के बगल में जिले कामरूप के दादरा और पचरिया मे अपने काम की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने काफी सारे सर्वेक्षण भी किए।

साल 2017 में Whitley अवार्ड से नवाजा गया। इस अवॉर्ड का दूसरा नाम ग्रीन ऑस्कर भी है। आज पूर्णिमा देवी बर्मन 200 महिलाओं का सेल्फ हेल्प ग्रुप को चला रही हैं। इस ग्रुप का नाम है हरगिला आर्मी।

उन्हें भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की 29 अन्य महिलाओं के साथ नारी शक्ति पुरस्कार, 2017 से सम्मानित किया गया।

अधिक से अधिक सारस (क्रौंच पक्षी) के संरक्षण की दिशा में उनके अविश्वसनीय प्रयासों को स्वीकार करते हुए, असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने पर्यावरणविद् पूर्णिमा देवी बर्मन को “हरगिला” के नाम से सम्मानित किया।

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