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टोक्यो पैरालंपिक में मेडल की उम्मीद

photo courtesy :PIB / PO

टोक्यो ओलंपिक 2020 तो खत्म हो चुका है. लेकिन ओलंपिक की खुमारी अभी भी उतरी नहीं है. और शायद इतनी जल्दी उतरने वाली भी नहीं है. क्योंकि अब टोक्यो में ही पैरालंपिक खेलों का आयोजन होने जा रहा है. सब कुछ टोक्यो ओलंपिक 2020 की तरह ही होगा. जगह वही, खेल वही और मेडल भी वही. बस खिलाड़ी बदल जाएंगे. पैरालंपिक में सिर्फ फिजिकली डिसएबल्ड खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं. फिजिकली डिसएबल्ड खिलाड़ी अपने-अपने देशों का प्रतिनिधत्व करेंगे और मेडल जीतने की कोशिश करेंगे.

इसी महीने की 24 अगस्त से लेकर 5 सितंबर तक पैरालंपिक खेलों का आयोजन होने वाला है. कई भारतीय खिलाड़ी हैं, जिनसे उम्मीद की जा सकती है की वो पैरालंपिक में भारत को गोल्ड दिला सकते हैं. लेकिन उन खिलाड़ियों के बारे में आगे चर्चा करेंगे, सबसे पहले बात करते हैं पैरालंपिक खेलों की शुरूआत कब और कैसे हुई?

पैरालंपिक खेलों की शुरूआत
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तकरीबन 80 साल पहले पैरालिंपिक खेलों को शुरू करने का मकसद दूसरे विश्व युद्ध के बाद घायल सैनिकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए से हुई थी. दूसरे विश्व युद्ध की वजह से घायल हुए और स्पाइनल इंजरी के शिकार सैनिकों के इलाज करने के लिए सर लुडविग गुट्टमैन ने पैरालिंपिक खेलों की शुरुवात की. सर लुडविग गुट्टमैन जो एक न्यूरोलॉजिस्ट थे इन्हें ‘पैरालिंपिक खेलों का फादर’ कहा जाता है.

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स्टोक मानडेविल अस्पताल में उन्होंने स्पाइनल इंजरी सेंटर खोला था. वर्ष 1948 में विश्वयुद्ध के बाद सर लुडविग ने रिहैबिलीटेशन के लिए खेल को चुना. और यहीं से पैरालिंपिक गेम्स की शुरुआत हुई. शुरुवाती दौर में इसे व्हीलचेयर गेम्स के नाम से जाना जाता था. बाद में इसका नाम बदलकर पैरालंपिक कर दिया गया.

सर लुडविग गुट्टमैन ने पहली बार 29 जुलाई 1948 में लंदन ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी के दौरान व्हीलचेयर एथलीटों के लिए गेम्स का आयोजन किया. जिसका नाम उन्होंने स्टोक मानडेविल गेम्स रखा था. इस दौरान 16 घायल सैनिक और औरतों ने तीरंदाजी में हिस्सा लिया था. सर लुडविग ने इसे प्रयोग के तौर पर शुरू किया था और उनका प्रयोग सफल रहा. फिर चार साल बाद यानि वर्ष 1952 में फिर इस स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन का आयोजन हुआ.

इस बार तो ब्रिटिश सैनिकों के अलावा डच सैनिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. ठीक आठ साल बाद वर्ष 1960 में रोम ओलंपिक का आयोजन हुआ. सर लुडविग गुट्टमैन ने जो ख्वाब देखा था. वो पूरा हुआ. ओलंपिक में पहली बार पैरालिंपिक खेलों को जगह मिली. 23 देशों से लगभग 400 एथलीटों ने इस बार पैरालंपिक खेलों में हिस्सा लिया था. इसके साथ ही  22 सितंबर 1989 को इंटरनेशनल पैरालिंपिक कमिटी का गठन हुआ.

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54 खिलाड़ियों का दल रवाना
जैसा कि आप सभी जानते हैं. जापान के शहर टोक्यो में पैरालिंपिक खेलों का आयोजन हो रहा है. और ओलम्पिक 2020 में भारत ने इस बार सात मेडल जीते हैं. ऐसे में पैरालिंपिक खेलों से भी भारत को और उम्मीदें बढ़ गई हैं. कुल 54 खिलाड़ियों का दल टोक्यो रवाना हुआ है. किसी भी देश से ये सबसे ज्यादा है. पिछली बार रियो पैरालिंपिक में भारत ने कुल चार मेडल जीते थे. जिसमें से दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ लाया था.

इन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें
वैसे तो सभी 54 खिलाड़ियों से ही देश को मेडल्स की उम्मीदें रहेंगी. लेकिन कुछ ऐसे नाम हैं. जिन्हें ओलंपिक खेलने का अनुभव है. और देश के लिए मेडल भी जीत चुके हैं. जानते हैं उन पांच एथलीटों के बारे में जिनसे हम मेडल्स की आस लगाए बैठे हैं.

दीपा मलिक : दीपा मलिक, पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला और देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित हैं.

दीपा ने 2011 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट F52-53 में एक रजत सहित कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में चार पदक भी जीते हैं – 2010 में एक कांस्य (भाला फेंक F52-53), 2014 में एक रजत (भाला फेंक F52-53), 2018 में दो कांस्य (चक्का फेंक F52-53 और भाला फेंक F53-) 54).

“मेरे लिए खेल जागरूकता पैदा करने का एक उपकरण था कि आप जो चाहें कर सकते हैं, और शारीरिक अक्षमताओं का कोई मतलब नहीं है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, मैंने जो कुछ भी किया उसमें रिकॉर्ड तोड़े और भारत को और ऊंचाइयों पर लेकर गई हूँ.”

एकता भयान : एकता भारत के महिला क्लब की एक पैरा एथलीट है जो महिला क्लब और डिस्कस थ्रो स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित 2018 एशियाई पैरा खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया और क्लब थ्रो इवेंट में स्वर्ण पदक जीता. विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप (लंदन 2017 और दुबई 2019) में लगातार दूसरी उपस्थिति के बाद, उसने टोक्यो 2020 पैरालिंपिक के लिए क्वालीफाई किया। उन्होंने 2016 में बर्लिन में आयोजित कई IPC ग्रांड प्रीस्क में, 2017 में दुबई और 2018 में ट्यूनीशिया में भी प्रतिस्पर्धा की और पदक जीते।

 

photo courtesy :PIB

भाविना पटेल – गुजरात राज्य की भाविना पटेल और सोनलबेन पटेल दोनों पैरालंपिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करेंगी। यह जोड़ी क्रमशः पैरा टेबल टेनिस महिला एकल व्हीलचेयर वर्ग 4 श्रेणी और महिला एकल व्हीलचेयर वर्ग 3 श्रेणी में भाग ले रही है। वे महिला युगल स्पर्धा में भी जोड़ी के रूप में भाग लेंगी।

 

 

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भाविना और सोनलबेन अपने क्वालीफिकेशन राउंड की शुरुआत टोक्यो में पहले दिन यानी 25 अगस्त को करेंगी। क्वालीफाइंग राउंड 25, 26 और 27 अगस्त को होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल क्रमशः 28 और 29 अगस्त को होंगे। दोनों खिलाड़ियों ने अहमदाबाद स्थित ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन में प्रशिक्षक ललन दोषी की देख-रेख में प्रशिक्षण लिया है। भाविना जहां इस समय अपने वर्ग में दुनिया में 8वें स्थान पर हैं, वहीं सोनलबेन 19वें स्थान पर हैं। दोनों सरदार पटेल पुरस्कार और एकलव्य पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं और एशियाई खेलों में पदक विजेता रही हैं। दोनों खिलाड़ी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) कोर ग्रुप का हिस्सा हैं और दोनों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के मामले में भारत सरकार से महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है। भाविना को व्यक्तिगत प्रशिक्षण के लिए टीटी टेबल, रोबोट और टीटी व्हीलचेयर तथा आगामी टोक्यो पैरालंपिक खेलों की तैयारी के लिए फिजियोथेरेपी, आहार विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और प्रशिक्षण शुल्क के साथ-साथ प्रशिक्षण के लिए टेबल टेनिस बॉल, प्लाई, रबर, गोंद आदि जैसे उनके खेल से जुड़े विशिष्ट उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी मिली है।

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पैरा टीटी से जुड़ी अपनी बड़ी बहनों के नक्शेकदम पर चलते हुए पैरालंपिक खेलों में पैरा ताइक्वांडो में भारत की एकमात्र प्रतिनिधि 21 वर्ष की अरुणा तंवर होंगी। हरियाणा की अरुणा महिलाओं के 49 किलोग्राम से कम भार के के-44 वर्ग में भाग लेंगी। वो 2 सितंबर को राउंड- ऑफ-16 राउंड्स में अपना जौहर दिखायेंगी।

अरुणा इस समय के-44 वर्ग में 30वें स्थान पर हैं और वो 2018 में वियतनाम में आयोजित एशियाई पैरा ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में रजत पदक विजेता रही हैं। साथ ही, वो 2019 में तुर्की में आयोजित विश्व पैरा ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में कांस्य पदक विजेता रही हैं। वो टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) का एक हिस्सा हैं और उन्हें उनके खेल से जुड़े विशिष्ट उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी मिली है।

 

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पैरा पावरलिफ्टिंग के लिए भारत जय दीप और सकीना खातून के रूप में दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को वहां भेज रहा है। जहां एक ओर पश्चिम बंगाल में जन्मी सकीना बेंगलुरु स्थित साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के रहने वाले जय दीप रोहतक स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये दोनों ही टॉप्‍स कोर टीम का हिस्सा हैं।

सकीना, जो महिलाओं के 50 किग्रा तक के वर्ग में भाग लेंगी, अब तक की एकमात्र भारतीय महिला पैरालिंपियन हैं, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में कोई पदक जीता है। उन्‍होंने वर्ष 2014 में ग्लासगो में यह पदक जीता था। वह पैरा एशियन गेम्स 2018 की रजत पदक विजेता भी हैं। बचपन में हुई पोलियो की गंभीर बीमारी की वजह से ही सकीना दिव्‍यांगता से ग्रस्‍त हो गई हैं। मैट्रिक तक पढ़ाई कर लेने के बाद उन्होंने दिलीप मजूमदार और अपने वर्तमान कोच फरमान बाशा से प्राप्‍त वित्तीय सहायता की बदौलत वर्ष 2010 में पावरलिफ्टिंग प्रशिक्षण शुरू किया।

जय दीप, जो पुरुषों के 65 किग्रा तक के वर्ग में भाग ले रहे हैं, भारतीय खेल प्राधिकरण में सहायक कोच हैं। इन दोनों ही खिलाडि़यों को तीन से भी अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने और खेल किट से युक्‍त खेल विज्ञान सहायता के साथ राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों में भाग लेने में भारत सरकार की ओर से महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्‍त हुआ है। ये दोनों ही खिलाड़ी 27 अगस्त को अपने-अपने फाइनल राउंड में टोक्यो में खेलेंगे।

मनीष नरवाल : 10 मीटर की एयर पिस्टल में मनीष हिस्सा लेते हैं. हरियाणा से तालुक्क रखते हैं. ये मनीष का पहला पैरालंपिक है. 19 साल का ये निशानेबाज विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर पर आता है. पांच साल पहले ही उन्होंने पहली बार हाथ में पिस्टल लेकर निशानेबाजी शुरू की थी. और अब भारत का प्रतिनिधित्व सबसे बड़े मंच पर करने जा रहे हैं.

मरियप्पन थंगावेलु : मरियप्पन पैरालिंपिक में भारत के ध्वजावाहक भी होंगे. वैसे, रियो पैरालिंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट मरियप्पन को कौन नहीं जानता. पुरूषों की T42 कैटेगरी में इस खिलाड़ी ने ऊंची कूद में भारत को सोना दिलाया था. फिर वर्ष 2019 के विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इस खिलाड़ी ने देश को कांस्य पदक भी दिलाया. ऐसे में मरियप्पन से गोल्ड की उम्मीद करना तो हम भारतीयों का हक़ बनता है.

देवेंद्र झाझड़िया: देवेंद्र झाझड़िया जैवलिन थ्रोअर हैं और भारत के लिए दो बार गोल्ड जीत चुके हैं. पहली बार एथेंस पैरालिंपिक में और फिर रियो पैरालिंपिक में. 40 साल के इस खिलाड़ी में अब भी दमखम है और ये F46 कैटेगरी में हिस्सा लेते हैं. इसी साल जुलाई में देवेंद्र ने 65.71 मीटर भाला फेंक कर अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर टोक्यो पैरालिंपिक के लिए क्वालीफाई किया था.

यंहा सिर्फ इन पांच खिलाड़ियों के बारे में बताया है लेकिन सुंदर सिंह गुर्जर, प्रमोद भगत और सुमित अंतिल जैसे कई और खिलाड़ी हैं जो भारत को मेडल दिला सकते हैं. उम्मीद करते हैं इस बार टोक्यो पैरालंपिक में रियो पैरालंपिक से भी ज्यादा मेडल भारत जीते.

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His camera is his canvas. Photojournalist Azhar Khan is best known for his travel-based stories and women-centric articles, besides his lens eyes that cover Bollywood. With over a decade in journalism, Azhar Khan's works have featured in Indian and International media including Mid-Day, HT Media Ltd, Mumbai Mirror, Chitralekha Magazine, Metro Now (Delhi), Urban Asian, Getty Images, Warner Bros. Pictures, BBC, Alamy News, Sopa Images, Pacific News Agencies, among others.