
टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक गेम्स में भारत की पैराशूटर अवनि लेखरा ने गोल्ड मेडल जीता है। 11 साल की उम्र में एक एक्सीडेंट की वजह से उनके कमर के नीचे का हिस्सा लकवा ग्रस्त हो गया था, लेकिन उनके पिता ने उन्हें हौसला दिया और शूटींग से इंट्रोडूस कराया।
अवनि लेखरा सिर्फ 19 साल की उम्र में किसी भी एक पैरालंपिक गेम्स में दो मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी है।
“मुझे विश्वास नहीं हुआ की मैंने भारत के लिए गोल्ड मैडल जीता है। मैं बहुत ख़ुश हूँ की मुझे इतना प्यार मिल रहा है और लोग मुझे सपोर्ट कर रहे हैं।” अवनि ने बताया। अवनि 11 साल की थी जब एक कार एक्सीडेंट में कमर के नीचे से पेरालाइस हो गईं।
First woman in history to win GOLD in shooting for #IND
Clapping hands sign for Avani Lekhara #Tokyo2020 #ShootingParaSport #Paralympics
Photo: @Paralympics @AvaniLekhara pic.twitter.com/JsMRK2Vmg8— Azhar Khan (@azhar3) September 3, 2021
मैं एक्सिडेंट के बाद लोगों से ज्यादा घुलती मिलती नहीं थी। पर मेरे पापा को लगता था की मैं पहले के मुकाबले लोगों से ज्यादा बात करना शुरू करूँ। एक दिन गर्मियों की छुट्टियों के दौरान पापा ने मुझे शूटिंग और आर्चरी रेंज में ले गए। मैंने पहले तीरंदाजी में हाथ आजमाया। पर क्योंकि मेरे शरीर का ऊपरी हिस्सा कमज़ोर था, इसलिए मैं धनुष को ठीक से पकड़ नहीं पति थी। उसी दिन हम शूटिंग रेंज भी गए और जाते ही मुझे एक जुड़ाव सा महसूस हुआ खासकर राइफल के साथ। मैंने इसे बस एक हॉबी के तौर पर शुरू किया था। और आज मैं यंहा पैरालंपिक गेम्स में हूँ।
भारत के लिए खेलने के साथ-साथ वह लॉ की पढ़ाई भी कर रही है। अवनि की मां कहती है कि कभी हार ना मानना ही अपनी अवनि की सबसे बड़ी ताकत है। एक्सिडेंट के टाइम में जब यह सब हो चुका था, तो दूसरे बच्चों को हंसता खेलता और दौड़ता देखती, मैं दुखी रहती थी। तो अवनि मुझसे यही कहती थी मम्मी मेरे पैर तो आप देखते हो ना, मेरे पैर पहले से ही पतले हैं, तो मैं दौड़ भी नहीं पाती। तो ठीक है न पर अभी मैं व्हील चेयर पर हूँ। और व्हील चेयर पर भाग सकती हूँ। यह उसकी एक बड़ी स्ट्रैंथ है।
गोल्ड मैडल जितने के साथ साथ अवनि ने 10 मीटर एयर राइफल कैटेगरी में नया पैरालंपिक रिकॉर्ड भी बनाया है। भारत ने इस बार सबसे बड़ा दल पैरालंपिक में भेजा है। लेकिन इसमें महिला खिलाड़ी सिर्फ तीस पर्सेंट से भी कम है।










