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सुभद्रा कुमारी चौहान – असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाली पहली महिला

Subhadra Kumari Chauhan google doodle
Subhadra Kumari Chauhan google doodle

“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी.” इस कविता की लेखिका थीं सुभद्रा कुमारी चौहान. झांसी की रानी को याद करते हुए ये पंक्तियां देश के लगभग हर बच्चे को याद है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के निहालपुर गांव में जन्मी सुभद्रा कुमारी चौहान ने महज 9 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी थी.

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं ने आजादी की लड़ाई में भारतीय यौद्धाओं का खूब मनोबल बढ़ाया. सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपने मन की भावनाओं, जज्बे और उल्लास को न सिर्फ कविता के जरिए कागज पर उकेरा, बल्कि असल जिंदगी में भी जिया. सुभद्रा कुमारी चौहान देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला थीं.

अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई में सुभद्रा कुमारी ने एक सक्रिय भूमिका निभाई. अंग्रेजी सरकार की लाठियां खाईं, जेल भी गईं लेकिन अपने हौंसलों का पस्त नहीं होने दिया. उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से दूसरे लोगों को आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया.

इतिहास के पन्ने इस बात का गवाह हैं कि सुभद्र कुमारी चौहान किसी के घुटने टेंकने में विश्वास नहीं करती थी. उन्होंने अपनी मौत के बारे में कहा था, “मेरे मन में तो मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है. मैं चाहती हूं, मेरी एक समाधि हो, जिसके चारों तरफ मेला लगा हो, बच्चे खेल रहें हो, स्त्रियां गा रही हो और खूब शोर हो रहा हो.”

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