
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है लेकिन राष्ट्र बोलने से कतराता है। जुबान से ए बी सी डी जिस कॉन्फिडेंस से फूटती है, क ख ग उस आत्मविश्वास से क्यों नहीं निकलता। माँ बाप भी चौड़े होकर बताते हैं, जब बच्चे फर्राटेदार इंग्लिश बोलते हैं। अंग्रेजी में पैदल हो तो शर्म आ जाती है, लेकिन हिंदी में हाथ तंग हो तो माथे पर शिकन भी नहीं आती।
भाषा कभी सोशल सर्कल का पासवर्ड बन जाती है, तो कभी हमारे टैलेंट का सर्टिफिकेट। फ़िल्मी दुनिया ने हमेश मेरी अंग्रेजी का मजाक उड़ाया, मेरी आलोचना की। मगर उन्ही के बीच रहकर मैंने हिंदी भाषा को सर्वप्रिय रखा। जिसके कारण मुझे मेरे काम में एक नया मुकाम मिला और भारी रूप से सफलता मिली।
मैं हर माँ से विनंती करती हूं कि जैसे वो देसी घी के लड्डू बच्चों को खिलाते हैं, उसी तरह से हिंदी भाषा की ऐसी ही घुट्टी पिलायें। क्यूंकि जो स्वाद देशी परांठों में हो वो पिज़्ज़ा और बर्गर में नहीं होता। जो अपनापन माँ शब्द में है वो मॉम में नहीं होता है।
#KanganaRanaut expressed her view on #हिंदी_दिवस pic.twitter.com/j7O1mKTcCx
— Kangster (@KangsterEnigma1) September 14, 2021










