Home #Trending City-Highlights अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2021 – क्योंकि, मैं एक लड़की हूं

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2021 – क्योंकि, मैं एक लड़की हूं

प्राचीन काल में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता था, परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया इनकी स्थिति में काफी बदलाव आया। लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी। बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि रूढ़ीवादी प्रथाएं काफी प्रचलित थी। इसी कारण लड़कियों को शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार और चिकित्सा जैसे अधिकारों से वंचित रखा जाने लगा।

लेकिन आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार इस दिशा में काम कर रही है, और कई योजनाएं लागू कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना है। ताकि घर में उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वह सामना कर सकें और अपनी जरूरतों को पूरा कर सके।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के कार्यक्रमों से घर में लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असमानता को खत्म करने में कामयाबी मिली है। लैंगिक और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर समान वेतन तक के मुद्दों पर वैश्विक आंदोलन का नेतृत्व किया है। आज ज्यादातर लड़कियां स्कूल जाने लगी है, पढ़ाई पूरी कर रही है। उनको अब जल्दी शादी करने के लिए भी फोर्स नहीं किया जा रहा है। इसके लिए कई आंदोलनों का विस्तार हुआ है। किशोर लड़कियों के लिए और बाल विवाह, शिक्षा, समानता, लिंग आधारित हिंसा, जलवायु परिवर्तन, आत्मसम्मान और लड़कियों के अधिकारों से संबंधित मुद्दों से निपटने और मासिक धर्म के दौरान पूजा स्थलों या सार्वजनिक स्थलों पर प्रवेश करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। लड़कियां यहां साबित कर रही है कि वे अनस्टॉपेबल है।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास बालिका दिवस मनाने की पहल एक गैर सरकारी संगठन प्लान इंटरनेशनल प्रोजेक्ट के रूप में की गई। इस संगठन में “क्योंकि, मैं एक लड़की हूं” नाम से एक अभियान भी शुरू किया। इसके बाद इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए कारण सरकार से संपर्क किया। संयुक्त राष्ट्र ने 19 सितंबर 2011 को एक प्रस्ताव पारित किया और इसके बाद से 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाने लगा। भारत सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए काफी योजनाओं को लागू किया है। जिसके तहत “बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ” एक उल्लेखनीय योजना है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार भी अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कर रहे हैं। भारत में भी 24 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी देश को सफल बनाने के लिए बालिकाओं का भी कदम से कदम मिलाकर चलना आवश्यक है। किसी ने सच ही कहा है, “लाडली बेटी स्कूल जाने लगी, संस्कारों की धरोहर वह सयानी क्या हुई कि बाबुल के कंधे झुके, उन्हीं कंधों पर गर्व का परचम लहराने लगी। पढ़ लिखकर रोजगार करती, हाथ पीले करके बेटियां बेटों से कम नहीं यह बात सबको समझ में आने लगी।”

Previous articleSamikssha Bhatnagar turns producer with BHRAAMAK
Next articleArchana Aggarwal Timeless Jewellery unveils her latest collection for Karwa Chauth
His camera is his canvas. Photojournalist Azhar Khan is best known for his travel-based stories and women-centric articles, besides his lens eyes that cover Bollywood. With over a decade in journalism, Azhar Khan's works have featured in Indian and International media including Mid-Day, HT Media Ltd, Mumbai Mirror, Chitralekha Magazine, Metro Now (Delhi), Urban Asian, Getty Images, Warner Bros. Pictures, BBC, Alamy News, Sopa Images, Pacific News Agencies, among others.