
रेणुका शहाणे न केवल एक अभिनेत्री हैं, बल्कि एक पटकथा लेखक और निर्देशक भी हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर मुखर होने में विश्वास रखती हैं। दिग्गज अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने टीवी से लेकर फिल्मों तक, पत्रकारिता से लेकर लेखन तक, सामाजिक सक्रियता में कई बदलाव किए हैं। हमने उन्हें हर किसी की पसंदीदा बहू के रूप में, किसी की प्रेमिका, एक टीवी शो होस्ट और बॉलीवुड और टेलीविशन में कई अन्य भूमिकाओं के रूप में देखा है। हालांकि, वह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं हैं, वह उससे कहीं अधिक है।
कला, साहित्य से थिएटर का सफर
कॉलेज में थिएटर के लिए उनका प्यार शायद एक अभिनेत्री बनने में एक प्रमुख प्रेरक रहा। उनकी मां एक प्रसिद्ध लेखिका थीं, शायद इसी वजह से उनको अपने लिए करियर विकल्पों को चुनने में कोई परेशानी नहीं आई।
रेणुका जी की मां एक शिक्षक, प्रोफेसर और एक कला निर्देशक भी रहीं हैं, जबकि रेणुका खुद मुंबई विश्वविद्यालय से एक क्लिनिकल साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) प्रमुख हैं। रेणुका शहाणे ने अपने मीडिया इंटरव्यू में कहा वह अपने आपको सौभाग्यशाली मानती हैं कि उनको बहुत कम उम्र से एक ऐसी दुनिया से परिचित कराया गया जिसमें नृत्य, कला, संगीत, साहित्य, सिनेमा और अन्य कला रूप शामिल थे। उनका कहना है कि – “इन सब से प्रेरित होकर वह महिला बन पायी जो वह आज हैं।”
हमने रेणुका जी को बहुत सारी फिल्मो और टीवी सीरियल्स में देखा है साथ ही में वह अपने आप में एक अच्छी लेखिका भी हैं। एक इंटरव्यू में वह स्वीकार करती है कि उनके जीवन में लेखन बहुत देर से आया। उनकी शादी के बाद और उनके माँ बनने के बाद। छोटी उम्र से ही उन्होंने एक निर्देशक बनने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपनी मां शांता गोखले के उपन्यास रीता वेलिंगकर पर बनी एक मराठी फिल्म रीता के लिए पटकथा लिखकर पूरा किया। उन्होंने सिर्फ स्क्रीनप्ले (पटकथा लेखन) किया पर उनका कोई भी लेख छापा नहीं।
टीवी से फिल्मों तक का सफर
मेरे माता-पिता जब सुरभि देखा करते थे और उसे बहुत पसंद करते थे। उन्हें जो सबसे ज्यादा पसंद आती वह थी हमेशा मुस्कुराती रहने वाली एंकर रेणुका शहाणे, जिन्होंने सिद्धार्थ काक के साथ मिलकर दर्शकों के दिलों में 10 साल तक राज किया।
रेणुका अलग-अलग क्षितिज की तलाश में थीं। फरीदा जलाल, पंकज बेरी के साथ रेणुका शहाणे ने 1987 में एक धारावाहिक “पीसी और मौसी“ से शुरुआत की। वह टीवी धारावाहिकों में आती-जाती रही, लेकिन सक्रिय रूप से अभिनय नहीं किया। फिर सर्कस, लाइफलाइन और फिर सुरभि जैसे कई सारे महान टीवी शो उनकी जिंदगी में आये।
रेणुका ने 1994 में बनी सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन‘ से फिल्मों में अपनी नई पहचान बनाई। हालांकि यह अजीब बात है की उन्होंने उस सफलता को कभी भुनाया नहीं। उन्होंने 2001 में आशुतोष राणा से शादी की और बाद में अपनी शादीशुदा जिंदगी में व्यस्त हो गईं। उनके पुत्र शौर्यमन और सत्येंद्रानंद ने उन्हें व्यस्त रखा।
रेणुका शहाणे अनुसार “जब टेलीविजन अपने स्वर्णींम युग में था, तब मुझे वास्तव में अच्छी चीजें प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।” उन्होंने शादी के बाद अपने पति आशुतोष राणा के कहने पर पटकथा लिखना शुरू किया। उनकी पहली फिल्म मराठी भाषा में रीटा (2009) थी। मुंबई में 2013 में मुंबई मंत्रा की पटकथा लेखक कार्यशाला का हिस्सा बनीं।
टीवी धारावाहिक, फ़िल्में, पटकथा लेखन जैसी कई प्रतिभाओं के बावजुद रेणुका शहाणे को ज्यादा अवार्ड्स और पुरस्कार नहीं मिले। उनको ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म के लिए 1994 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड् मिला। साथ ही 1998 के एक टीवी धारावाहिक कोरा कागज़ के लिए 2002 में उनको इंडियन टैली अवार्ड्स से नॉमिनेट किया गया।
एक प्रसिद्ध टेलीविजन और फिल्म अभिनेता और भारतीय मनोरंजन उद्योग की एक निर्देशक, रेणुका शहाणे, अब क्राइम पेट्रोल सतर्क: गुमराह बचपन की एंकरिंग करती नजर आएंगी। एक एंकर के रूप में, रेणुका का लक्ष्य किशोरों द्वारा किए गए अपराधों पर प्रकाश डालते हुए हर माता-पिता के गंभीर डर को सामने लाना है।
एक मजबूत महिला
हम सबने उन्हें एक मजबूत संदेश देने वाली, एक मजबूत महिला के रूप में देखा है. उनका यह मकसद विज्ञापनों और टीवी विज्ञापनों में भी दिखाई देता है जो वह करती है।
एक विज्ञापन का उदाहरण देते हुए रेणुका जी ने बताया, वह एक मध्यम आयु वर्ग की महिला की भूमिका निभाती है, जो अपने पति के बिना दो छोटी और एक बड़ी महिला के साथ छुट्टी पर जाती है। जैसा कि विज्ञापन में बताया गया है, दृढ़ता से मानती है कि एक महिला अपना अधिकांश जीवन दूसरों के लिए जीती है, लेकिन अपने लिए जीना शुरू करने में कभी देर नहीं होती है। वह कहती हैं, “एक महिला को खुद की देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि परिवार की नींव के रूप में, एक महिला का आत्म विकास स्वतः ही परिवार को विकास की ओर ले जाता है।”
वह महिलाओं के लचीलेपन और विभिन्न परिस्थितियों में भी मिलनसार स्वभाव से प्रेरित होती हैं। वह अपने इन सभी गुणों के बारे में अच्छा महसूस करती हैं, जो उनको अपने बच्चों के लिए ‘कूल मम’ बनाते हैं जिस कारण उनके बच्चे किसी भी समय खुलकर उनसे बात कर सकते हैं।
समाजिक मुद्दे
रेणुका शहाणे हमेशा ही समाज की भलाई के लिए आगे आयीं हैं. चाहे उनकी फिल्में हों या टीवी सीरियल्स, हमने उनको हर समय सामाजिक मुद्दों के बारे में बात करते हुए देखा है। उन्होंने रील लाइफ से बाहर भी कई सारे मुद्दों को गहराई से उठाया है. कन्या भ्रूण हत्या और दहेज जैसे मुद्दों के अलावा रंग नस्लवाद के बारे में उन्होंने कहा; रंग नस्लवाद की जड़ें हमारे समाज में बहुत गहरी हो गयीं हैं। भारत में नब्बे प्रतिशत लोग गहरे रंग के हैं, जो भूरे रंग के विभिन्न रंगों के अंतर्गत आते हैं। जिनमे से मैं भी एक हूँ. फिर भी, हम लगातार खुद की ऐसी कंडीशनिंग कर रहे हैं, विशेष रूप से महिलाएं जिन्हें सिर्फ गोरी त्वचा पाना है। वह टिप्पणी करते हुए कहती हैं “हमारे लोगों की मानसिकता को बदलना होगा, वह पश्चिमी सौंदर्य मानकों ‘गोरी त्वचा, नीली आँखें‘ को आँख बंद करके पालन करने लगे हैं।”
रेणुका शहाणे ने अपने एक मीडिया इंटरव्यू में ये भी माना कि अधिक से अधिक अभिनेताओं की एक्टिविज़्म के क्षेत्र में आवश्यकता है – जो हमेशा लोगों की नज़रों में रहते हैं. – अभिनेतााओं को लोगों की मदद करने की दृष्टि से भी देखना चाहिए।” वह कहती है, इसलिए यदि कोई अभिनेत्री अपने काम के माध्यम से सामाजिक कार्यों के बारे में बात करती हुई और कुछ सामाजिक कारणों के बारे में जागरूकता फैलाती हुई दिखाई देती है विशेष रूप से एक महिला – तो इसका असर होना तय है।
रेणुका शहाणे ने अपने फेसबुक पेज पर लड़कों में पीरियड्स के बारे में जागरूकता के संबंध में एक वीडियो पोस्ट किया था। इस अद्भुत और साहसिक कदम के पीछे के विचार और प्रेरणा के बारे में बात करते हुए, वह कहती हैं, “महिलाएं ज्यादातर समय पुरुषों से घिरी होती हैं, फिर भी पुरुष समझ नहीं पाते हैं, और न ही महिलाओं में मासिक धर्म के शारीरिक प्रभाव की परवाह करने की आवश्यकता को देखते हैं।”
वीडियो पोस्ट के माधयम से वह समाज को बताना चाहती हैं की, पीरियड्स एक ऐसा गुपचुप मामला होता है जिसके कारण पीरियड्स के संबंध में वास्तविक मुद्दे दर-किनार रह जाते हैं. रेणुका शहाणे का मानना है कि मासिक धर्म को लेकर जितनी भी गलत धारणाये हैं, महिलाओं द्वारा परिवार संग बातचीत करके ख़त्म करने की आवश्यकता है। “एक माँ को अपने परिवार से इस बातचीत को शुरू करने की जिम्मेदार लेनी चाहिए।“ महिलायें इस बारे में खुलकर बात करें तो वह परिवार से समर्थन और सहानुभूति पा सकती हैं और परिवार के पुरुष सदस्य उसे बेहतर ढंग से समझ पाएंगे
उनकी चमकती आँखों, उज्ज्वल मुस्कान और मधुर आवाज़ के साथ रेणुका शहाणे सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, वह एक माँ, एक लेखिका और एक कलाकार और भी कई सरे पहलुओं को अपने आप में समाये हुए हैं। इतनी सारी रूचियाँ वाली एक महिला, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।










