
हरे-भरे जंगल, अपने चारों तरफ से हरियाली की चादर ओढ़े खड़ी बड़ी-बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं और उनके साथ होकर गुजरती वागोरा नदी। ऐसे ही नेचुरल ब्यूटी के बीच मौजूद हैं अजंता की गुफाएं। यकीन मानिए इतिहास के इस धरोहर की यात्रा आपको ताउम्र याद रहने वाली है।
तो आइये आज सैर करते अजंता की इन्ही गुफाओं की और देखते हैं सोशल मीडिया में छाई हुई कुछ फोटोज को भी।
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महाराष्ट्र में गुफाओं की भरमार है, उनमें से लगभग 800 विभिन्न जिलों में फैली हुई हैं। लेकिन इनमें से, अजंता की विश्व धरोहर स्थल की 32 बौद्ध गुफाएं विशिष्ट रूप से अलग हैं और पर्यटकों को उनकी स्थापत्य वैभव, बौद्ध विरासत और कलात्मक कृतियों के कारण बड़ी संख्या में आकर्षित करती हैं।
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औरंगाबाद से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है अजंता केव्स। अजंता केव्स का नाम यहां से करीब 12 किलोमीटर दूर अजंठा गांव के नाम पर रखा गया था। अगर अजंता केव्स को एलोरा केव से कंपेयर करें तो अजंता केव्स कंपेरटिवली छोटा है। अजंता केव्स में लगभग तीस गुफाएं हैं। दूसरी तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर पांचवी से छठी शताब्दी के बीच मौर्य, वकटकास और राष्ट्रकूट राजवंशों के अलग-अलग काल खंडों के दौरान इन गुफाओं का निर्माण 2 फेस में हुआ था। फर्स्ट फेस में केव नंबर 9, 10, 12, 13 और 15 बनाई गई। तो वहीँ बाकी गुफाओं का निर्माण सेकंड फेस में हुआ था। जंहा केव नंबर 9 अजंता केव की सबसे पुरानी केव है। अगर अजंता केव का पूरा स्ट्रक्चर देखें तो इसे दो भागों में बांटा जा सकता है। सबसे पहला चैत्य जहां पर पूजा की जाती है और दूसरा 80 पर्सेंट एरिया विहार है जहां पर बौद्ध भिक्षु रहा करते थे। चूंकि अजंता की गुफाएं बौद्ध धर्म से प्रेरित है इसीलिए यहां की ज्यादातर दीवारों पर की गई नक्काशी भी बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई हैं।
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कहा जाता है कि गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ ने 1819 में की थी। जब वह यहां पर शिकार करने आए थे। इसके बाद से ही इन गुफाओं में पूरी दुनिया से टूरिस्टों का आना शुरू हो गया। अजंता केव्स को 1983 में वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल किया गया था। गुफा के प्रवेश द्वार के ठीक सामने दीवार काटकर बनाई गई बुद्ध की एक विशाल मूर्ति है। इसके अलावा आप यहां की दीवारों पर बौद्ध धर्म से जुड़ी कई पेंटिंग्स भी देख पाएंगे। जो आज हजार से भी अधिक साल बीत जाने के बावजूद भी आधुनिक समय के विद्वानों के लिए आश्चर्य का विषय है।
भगवान बुद्ध की पेंटिंग्स के साथ-साथ यहां अजंता की गुफाओं की दीवारों पर खूबसूरत अप्सराओं और राजकुमारियों की अलग-अलग मुद्राओं में उकेरे गए चित्र भी हैं। जो यहां की उत्कृष्ट चित्रकारी और मूर्तिकला का बहुत ही सुंदर उदाहरण है। अजंता केव्स में केव नंबर 1, 2, 4 और 17 काफी पॉपुलर है। केव नंबर वन की बात करें तो यह 20 स्तंभों पर बना एक बड़ा सा हॉल है। जहां पूरे हॉल की दीवार और छत पर आपको एक नायाब चित्रकारी देखने को मिलेगी।
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अजंता केव के पास ही कई सारे और भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन है जिन्हें भी आप एक्सप्लोर कर सकते हैं। जैसे एलोरा केव्स जो यहां से करीब 100 किलोमीटर है। दौलताबाद फोर्ट जो अजंता केव्स से करीब 115 किलोमीटर दूर है। सिद्धार्थ गार्डन एंड जू 100 किलोमीटर और श्री भद्र मारुति टेंपल 98 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप यहां से टैक्सी लेकर आसानी से शिरडी साईं मंदिर भी जा सकते हैं जो अजंता केव से करीब 200 किलोमीटर दूर है।
अजंता केव्स के लिए औरंगाबाद नियरेस्ट एयरपोर्ट है। जहां के लिए न्यू दिल्ली और मुंबई जैसी मेट्रो सिटी से डेली फ्लाइट अवेलेबल है। अगर आप रेल जर्नी करके अजंता केव तक आना चाहते हैं तो मध्य रेल के स्टेशन भुसावल और जलगांव से यहां सीधे पहुंचा जा सकता है। इन स्टेशनों से अजंता की दूरी 60 किलोमीटर के आसपास है। औरंगाबाद भारत के सभी मुख्य शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है तो यहां तक आप इसिली पहुंच सकते हैं।










