
फूलों की घाटी (Valley of Flowers) का नाम आते ही हमारे सामने उत्तराखंड का विचार आता है, लेकिन अपेक्षाकृत कम लोगों को ही पता होगा कि एक फूलों की घाटी महाराष्ट्र में भी है। महाराष्ट्र के सातारा जिले में पहाड़ पर स्थित कास पठार (Kaas Plateau) असंख्य सुन्दर फूलों के लिए प्रसिद्ध है।

कास पठार महाराष्ट्र की वैली ऑफ़ फ्लावर है। जो अगस्त और अक्टूबर के बीच मानसून के दौरान सबसे अच्छी तरह से देखी जाने वाली जगह है। कास प्लेटू सिर्फ आपकी सोशल मीडिया में तस्वीरें भरने की जगह के आलावा यह ज्यादातर एक आरक्षित वन है, यह भूमि 850 से अधिक फूलों की प्रजातियों का घर है, कुछ दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां और जिनमें से कई वनस्पति विज्ञान के लिए भी नई हैं, जो इसे अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण साइट बनाती हैं।
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हालांकि इस क्षेत्र में पिछले साल के दौरान आने वाले पर्यटक और ट्रेकर्स पर COVID-19 ने बाधा डाली, इस साल विज़िटर 1 सितंबर से यात्रा करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं।
इस साल ऑनलाइन पंजीकरण और बुकिंग अनिवार्य है; शुल्क 100 रुपये है, हालांकि पांच साल से कम उम्र के बच्चे मुफ्त में प्रवेश कर सकते हैं। बुकिंग वर्तमान में सितंबर के लिए खुली हैं. जबकि इस साल वर्तमान में फूलों के खिलने की संख्या बहुत कम है, सितंबर के अंत और अक्टूबर के शुरुआत के हफ्तों में अधिक फूल खिलने की संभावना ज्यादा हो सकती है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कन्फर्म पंजीकरण रद्द नहीं किया जा सकता है, और पर्यटकों से अनुरोध है कि वे रसीद का एक प्रिंटआउट लेकर आएं।

हर दिन, तीन समय स्लॉट हैं, जिसमे प्रत्येक स्लॉट के दौरान 1,000 पर्यटक की सीमा होगी। सुबह 7 बजे से 11 बजे, सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक, दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक। दोपहर 3 बजे के स्लॉट के लिए पर्यटकों को दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजे के बीच रिपोर्ट करना होगा।
कास पठार वास्तव में हर दो सप्ताह में रंग बदलने वाली जगह है, क्योंकि विभिन्न फूलों के पौधों का चक्र जून से शुरू होता है और मानसून के गहराते ही अधिक घना होता जाता है। इसलिए इसका स्थानीय नाम कास पठार या “फूलों का पठार” है। अगस्त और सितंबर महीने में पूरी घाटी नीले, पीले, लाल, सफ़ेद, इत्यादि रंग बिरंगे फूलों से भर जाती है। इन फूलों पर मंडराते भवरें और तितलियाँ पूरे नज़ारें को मनमोहक बना देती हैं। यंहा आपको ऑर्किड, वाइल्ड फ्लावर और कई सारे दुर्लभ छोटे खिलने वाले पौधों की एक अद्भुत विविधता देखने को मिल जाएगी।

वर्ष 2012 से ही यह यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व की विरासत स्थलों(UNESCO World Heritage Site) की सूची में दर्ज़ है। खास पठार के खिले हुए फूलों को दुर्भाग्य से उन पर्यटकों से खतरा है, जो पौधों को रौंदते हैं, फूल तोड़ते हैं और यंहा वंहा कूड़े को पठार पर फेंकते हैं। इस बार फेस मास्क और सामान्य COVID-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहेगा यंहा पर आने वाले लोगों पर।
फूलों से लदी घाटी और कास झील यंहा का असली आकर्षण हैं। इसके लिए एक दिन की यात्रा के रूप में यह सबसे अच्छी जगह है। हालांकि आप एमटीडीसी द्वारा अप्रूव कास विलेज रिज़ॉर्ट में एक कमरा भी बुक कर सकते हैं जो 10 मिनट की दूरी पर है या निवांत हिल रिज़ॉर्ट में, यह कास पठार के प्रवेश द्वार पर ही है।
खास पठार सतारा सिटी से 25 किमी की दूरी पर स्थित है। कास सड़क मार्ग द्वारा मुंबई से लगभग छह घंटे और पुणे से तीन घंटे की दूरी पर है। मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग (एनएच 48) से सतारा तक जाएं और कास पठार के लिए सतारा सिटी से बाहर निकलें। पार्किंग स्थल थोड़ी दूर है, लेकिन एसटी की बसें हैं जो नजदीक तक मामूली शुल्क लेकर यह दुरी को कम कर देती हैं। आपको यंहा पठार पर फूड स्टॉल या टॉयलेट जाने के लिए साधन नहीं मिलेंगे, इसके लिए आप पहले से तैयार रहें।










