
स्पीति घाटी, ऊंचे आसमान को छूते पहाड़ जो 9 से 10 महीने बर्फ से ढके रहते हैं। अगस्त और सितंबर का महीना यहां घूमने के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं। पर इस वक्त भी यहां ठंड बेशुमार होती है। ऐसे ही इस जगह को ठंडा रेगिस्तान कहा जाता है। स्पीति वैली में वैसे तो बहुत कुछ है देखने को पर स्पीति के चिचम गांव स्थित चिचम ब्रिज को देखना मेरे जीवन के सबसे अद्भुत अनुभवों में से एक रहा। चिचम ब्रिज एशिया के सबसे ऊंचा पुल है। हवा में मजबूती से डटा ये पुल 13596 फीट की ऊंचाई पर है और पूरी तरह से लोहे की मजबूत तारों से हवा में कसा हुआ है। ये ब्रिज चिचम और किब्बर नाम के दो गांवों को जोड़ता है। और इस ब्रिज पर से रोज़ कई गाड़ियों की आवाजाही होती है।
इसे ब्रिज के ऊपर खड़े होकर नीचे देखने पर दिल और दिमाग को हिला देने वाले अनुभव जैसा है। इस पुल के बनने से किब्बर से लोसार तक का सफर 40 किमी कम हो गया है। इसका उद्घाटन 2017 में हुआ था। पुल के निर्माण में 485.50 लाख रुपये की लागत आई थी।
स्पीति वैली के चिचम ब्रिज पर लाइन से लगे रंगबिरंगे झंडे जब हवा में उड़ते हैं तो नज़ारा देखने लायक होता है।यात्री पुल को पार करने के बाद चंद्रताल झील की ओर भी बढ़ बढ़ जाते हैं। जो इस वैली के एक और नायाब अजूबा है। जिसे देखने लोग न सिर्फ देश के कोने कोने से , बल्कि विदेशों से भी आते हैं। काज़ा, कॉमिक, लंगज़ा, धनकर, ताबो और नाको यहां के सबसे खुबसूरत हिल स्टेशन में शामिल हैं।










