
क्या आप सूचनाओं के ट्रेंड में क्या है यह देखने के लिए अपने फोन या सोशल मीडिया को बार-बार देखना पसंद करते हैं? अत्यधिक उपयोग और सोशल मीडिया की लत के बीच की रेखा इतनी धुंधली है, कि हमें यह जानना मुश्किल हो जाता है कि हम किस तरफ हैं।
एक ऐसे समय की कल्पना कर सकते हैं जब कोई स्मार्टफोन नहीं था, कोई सोशल मीडिया नहीं था, ऐप नहीं थे, हर सेकेंड में कोई नोटिफिकेशन नहीं आ रहा था और अंतहीन स्वाइप करने के लिए कुछ भी नहीं था। यह वर्ष 2005 से पहले का समय है, ठीक एक दशक पहले, लेकिन इसकी कल्पना करना पहले से ही लगभग असंभव है।
हर दिन उभरती नई तकनीक और नवीनतम ध्यान खींचने वाले ऐप्स के साथ, फोन और सोशल मीडिया से दूर रहना असंभव हो गया है। न केवल जेन जेड और मिलेनियल्स की दुनिया बल्कि हर पीढ़ी उनके फोन के इर्द-गिर्द घूमती है। यह कहते हुए, मुझे हाल ही में पढ़ा गया एक संदेश याद आ रहा है, “आपके फ़ोन ने आपके कैलेंडर, कैमरा और अलार्म घड़ी को बदल दिया है, इसे अपने परिवार की जगह न लेने दें।” सच है, अफसोस की बात यह है कि हम अक्सर सोशल मीडिया में खोये रहने की वजह से आसपास बैठे लोगों की परवाह नहीं करते हैं और तो इन दिनों में सोशल मीडिया भी लोगों की जान ले रहा है।
लोग सोशल मीडिया के पक्ष और विपक्ष दोनों में हैं। यह लोगों को जुड़े रहने की आजादी देता है, और चीजों को अधिक कुशलला के साथ मनोरंजन का एक अच्छा साधन है। क्या हमें वास्तव में सोशल मीडिया के दीवाने होने की ज़रूरत है? क्या हम इससे दूर नहीं रह सकते? और सोशल मीडिया पर कितना समय बिताया इसे वास्तव में एक लत कहा जा सकता है?
Social media addiction..
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— iCliniq (@icliniq) September 27, 2021
सोशल मीडिया की लत क्या है
एडिक्शन (व्यसन) एक बुरी आदत को दिया जाने वाला शब्द है जो आपकी जीवन शैली, आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है और जिसे तब तक छोड़ना मुश्किल होता है जब तक कि यह आपके जीवन पर बुरा प्रभाव डालना शुरू न कर दे। इसी तरह सोशल मीडिया की लत सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने की आदत है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, व्हाट्सएप, ट्विटर, टिंडर और ऐसे सैकड़ों विभिन्न सोशल मीडिया ऐप पर दिन में कुछ बार नज़र डालने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन, अपना अधिकांश समय उन पर खर्च करना निश्चित रूप से हानिकारक है।
मैं मानता हूं कि सोशल मीडिया लोगों और खासकर नौजवानों और यंग बच्चों के जीवन पर राज कर रहा है, लेकिन ऐसा क्या है जो इसे इतना एडिक्टिव बनाता है?
ज्यादातर, सोशल मीडिया को नशे की लत के लिए डिज़ाइन किया गया है। अधिकांश को छोटे स्टार्टअप के रूप में शुरू किया गया है, इसलिए उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कितने उपयोगकर्ता ऐप डाउनलोड करते हैं या कितने समय तक इसका उपयोग करते हैं। इसलिए विफलता की संभावना को कम करने के लिए, ऐप्स को “स्टिकेबिलिटी फैक्टर” के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिसका अर्थ है कि उपयोगकर्ता ऐप से चिपके रहते हैं, इसे बंद नहीं करते हैं।
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कहीं आप भी तो नहीं हो रहे सोशल मीडिया के नशे का शिकार ?
सोशल मीडिया की लत के लक्षण
1. आसान पहुँच की वजह सभी उम्र के लोग सोशल मीडिया पर समय बिताना खूब पसंद करते हैं। ये वैसे आपको बहुत सामान्य लग सकता है पर अपनों के पास बैठे होने के बाद भी आप लगातार घंटों तक उन्हें नज़रअंदाज़ करके अपने फ़ोन से चिपके हुए हैं और अलग से अपना मनोरंजन कर कर रहे है, तो इसे तकनीक का उपयोग नहीं नशा कहते हैं।
2. आपने फ़ोन के नोटिफिकेशन के पॉप अप को देखने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा बेचेन रहना, सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों की किसी भी पोस्ट को लाइक या कमेंट करने के लिए बेताब रहना। ये भी लक्षण है सोशल मीडिया की लत के।
3. आजकल हर दिन सस्ते होते इंटरनेट डाटा प्लान और अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी की वजह से सबके फ़ोन्स पर ढेरों ऐपस मौजूद हैं। तेज इंटरनेट से ऐप या सोशल मीडिया साइट्स जल्दी लोड हो जाती हैं, यह भी एक वजह है सोशल मीडिया से चिपके रहने की। अगर ऐप लोड होने में समय लेते या हमेशा लोड होने में समस्या होती है, तो कोई भी ऐप का इस्तेमाल करने की जहमत नहीं उठाता।
4. जब आप अपनी टाइमलाइन पर तस्वीरें या कहानियां पोस्ट करते हैं, तो आपको जितने लाइक या कमेंट मिलते हैं, वह आपको खास होने का एहसास कराते हैं। जैसे-जैसे दिन बीतते हैं यह व्यक्ति को और अधिक लोकप्रिय बनाता है, इसलिए आप चौबीसों घंटे कुछ न कुछ पोस्ट करते रहते है।
5. सोशल मीडिया साइट्स पर बिना रोकटोक के अपनी पसंद की कोई भी चीज़ पोस्ट करने की आजादी है। यह व्यक्ति को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जिससे वह इसके आदी हो जाते हैं।










