Home Lifestyle Special Story किरण राव – बालों के रंग पर इतना हंगामा क्यों ?

किरण राव – बालों के रंग पर इतना हंगामा क्यों ?

किरण राव - बालों के ग्रे रंग पर मीडिया में इतना बवाल क्यों ?
Kiran Rao

आंखें जरा झुकाकर देखो… सूट पहनती हो तो दुपट्टा सलीके से पहनो। दुनिया के सामने बोलने से पहले 2 बार सोचो, जमाना बेशक 21वीं सदी का आ गया होगा लेकिन महिलाओं को कहने वाले ये शब्द आजतक नहीं बदले। याद है गली के कोने पर बैठक जमाए वो आंटियां जो अक्सर बातें बनाती फिरती थीं कि जो लड़की स्टाइल में रहती है यानि की मेकअप, फुल ड्रेसअप में रहती है वो न तो घर के कामों में मदद करती होगी और न ही पढ़ाई करती होगी। आंटी जी का तो काम ही होता था बिंदास लड़कियों को पूरे मोहल्ले के सामने बुरा बनाने का।

ठीक वैसे ही अपनी रील और रियल लाइफ में बिंदास रहने वाली एक्ट्रेस को अक्सर उनके पहनावे, बोलने के तरीके और बालों के कलर के लिए ट्रोल किया जाता है। जब एक एक्ट्रेस के बारे में लोगों की ये सोच है तो आम महिलाओं का क्या ही हाल होगा इसकी बात तो छोड़ दीजिए। हमारे समाज ने महिलाओं के लिए एक ड्रेसकोड, बात करने का तरीका तक तय कर दिया है और अगर महिलाएं इस तरीके को अपनाना छोड़ दें तो पुरुष प्रधान समाज को बर्दाश्त नहीं होता। उम्र के एक पड़ाव में आकर हर महिला सफेद बालों को छिपाने के लिए कलर करती है, लेकिन ये समाज कहता है कि बालों को हमेशा ब्लैक कलर से ही डाई करवाना चाहिए। मैं ये बात इसलिए कह रही हूं क्योंकि पिछले दिनों किरण राव के ग्रे बालों पर लोगों ने उन्हें ऐसे ट्रोल किया मानो उनसे कोई गुनाह हो गया।

सोशल मीडिया यूजर्स ने तो किरण राव के संस्कारों तक पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ लोगों ने तो ये तक कह दिया कि बालों में ग्रे कलर करवाने के बाद किरण अब एक अच्छी मां नहीं बन सकती। एक महिला अपने बालों को किस रंग में रंगे क्या अब ये भी समाज तय करेंगा ?

जैसे ही मीडिया में किरण राव की ग्रे बालों में फोटो वायरल हुई। उसके साथ ही शुरू हो गया, अजीबो – गरीब हेडलाइंस का सिलसिला। क्यों एक महिला के बालों का रंगा न जाना उसकी कमज़ोरी और बदसूरती मानी जाती है ?

अगर बालों के रंग के हिसाब से किसी लड़की या महिला को जज करते हैं तब तो फिर आपका जजमेंट ही गलत है। आप बालों के कलर के आधार पर किसी महिला के संस्कारों पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगा सकते। अगर लगाते हैं तो ये आपकी परवरिश पर सवाल उठाता है। एक पुरुष अगर बालों में ग्रे, ब्राउन, ग्रीन कलर करता है तो वो कूल लुक हो जाता है और महिला करें तो वो असंस्कारी? आप एक पुरुष को किसी भी तरह स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, लेकिन महिला में जरा सा भी बदलाव आपका हजामा खराब कर देता है?

किरण राव ही क्यों पिछले दिनों समीरा रेड्डी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाला। फोटो के कैप्शन में समीरा रेड्डी ने बताया कि उनके पिता इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनके सफेद बालों को देखकर लोग उन्हें किस तरह जज करेंगे। समीरा ने लिखा, “मेरे पिता ने पूछा कि मैं अपने सफेद बाल कवर क्यों नहीं कर रही हूं? उन्हें डर था कि लोग मुझे जज करेंगे। मैंने जवाब दिया कि अगर करेंगे तो क्या। क्या उनका ये मतलब है कि मैं बूढ़ी हो गई हूं। सुंदर नहीं हूं, तैयार नहीं हूं, अपीलिंग नहीं हूं?” समीरा ने आगे लिखा, “मैंने उनसे कहा कि मैं इन चीजों के बारे में पागल नहीं हूं, जैसे मैं पहले हुआ करती थी और यह स्वतंत्रता एक मुक्ति है। मैं पहले हर 2 हफ्ते में बालों पर कलर करती थी, ताकि कोई भी सफेद रंग को ना देख पाए। लेकिन अब मैं अपना खुद का समय लेती हूं और जब मुझे लगता है या मेरा मन करता है तभी कलर करती हूं।”

एक एक्ट्रेस के पिता का इस तरह की चिंता होना लाजिमी था, लेकिन सोसायटी को इस बात से भी परेशानी है। समीरा रेड्डी के इस पोस्ट के बाद लोग उन्हें सलाह देने में मशगूल हो गए कि उन्हें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए, 2 सप्ताह में क्यों हर सप्ताह बालों में कलर करवाना चाहिए। लोगों ने समीरा को कई एक्ट्रेस से इंस्पीरेशन लेने की बात तक कह डाली।

एक लड़की को उसके पहनावे, बालों के कलर पर जज करने वाले लोगों अपने दिमाग की गंदगी को दूर करिए। सबको अपनी लाइफ जीने के हक है। दूसरों की जिंदगी में अपने विचार थोपना बंद कीजिए। अपने दिमाग का कूड़ा किसी और को जज करने में व्यर्थ मत कीजिए। भूलिए मत हर इंसान को एक ही जिंदगी मिली है। जिस महिला को जज करने आप अपने वक्त दे रहे हैं उतना वक्त घर में रहने वाली मां, बहन, पत्नी और बेटी के कामों को बांटने में दीजिए तो शायद उनकी कोई मदद हो जाए और आपको भी इस बात का एहसास हो कि औरत के सिर पर कितने कांटों का ताज है।

 

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