
अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस 2021 सितंबर के अंतिम रविवार को मनाया गया
बिटिया के संग दौड़ी भागी तो पहुंच गई मैं बचपन में
कांधे पर बिटिया खूब हंसी जैसे हंसती थी बचपन में…
जब भी बेटियों की बात आती है तो कविता, कहानी, किस्से अपने आप याद आ जाते हैं। एक घर से दूसरे घर तक में खुशियां लाने वाली बेटियों की राह आसानी नहीं होती, इसके बावजूद वो पूरे जहां में एक अलग पहचाने बनाने की कोशिश में जुटी रहती है। बेटी के प्यार, समर्पण और त्याग को देखते हुए सारी दुनिया आज डॉटर्स डे मना रही है. वैसे तो हर दिन की बेटियों को समर्पित है, लेकिन ये दिन काफी खास है। हर साल सितंबर महीने के आखिरी रविवार को अंतरराष्ट्रीय डॉटर्स डे (International Daughter’s Day) के तौर पर मनाया जाता है।
समाज में एक बेटा और बेटी को एक समान दर्जा दिलाने के लिए इस दिन की शुरुआत आज से महज 9 साल पहले संयुष्त राष्ट्र में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र की इस पहल का स्वागत विश्व के सभी देशों ने भी किया जिसके बाद हर देश में बेटियों के लिए एक दिन समर्पित किया जाता है।
डॉटर्स डे (Daughter’s Day) का महत्व बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि बेटियां परिवार को जोड़े रखने का एक साधन है। परिवार के साथ संबंध बनाए रखने में बेटियों का अहम किरदार रहता है, जिस समाज में महिलाओं को पुरुष से कम आंका जाता है उस समाज में बदलाव लाने की जरूरत है इसलिए इस दिन को अहमियत दी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दिन को इसलिए मनाया जाता ताकि उन्हें इस बात का आश्वासन दिलाया जा सके कि वो कितनी खास हैं। यह दिन बेटियों के लिए जागरूकता बढ़ाने और समानता को प्रोत्साहित करने के लिए भी खास है। इस दिन को मनाने का मतलब लोगों को जागरूक करना है कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय डॉटर्स डे पर सिटी वुमन भारत की सभी बेटियों को सलाम करता है।










