
अंकुश कौशल / गेस्ट राइटर
आजकल यू पी एस सी की आईएएस परीक्षा का परिणाम चाहे वो मीडिया हो या सोशल मीडिया सब जगह छाया हुआ है। इससे भी अधिक प्रचलन में है आईएएस टीना डाबी की बहन रिया डाबी हो भी क्यों न, दोनों बहनों ने इस देश की सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली परीक्षा को पास कर देश के प्रशाशन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। लेकिन क्या इन दोनों बहनों की मेहनत के अलावा कुछ और भी था जो उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया। जी हाँ वो था उनके परिवार का साथ। सिर्फ किताबी परीक्षाओं में नहीं बल्कि जीवन की परीक्षाओं में भी परिवार का साथ बहुत ज्यादा आवश्यक है।
उदाहरण के तौर पर अगर परिवार का सहयोग न होता तो शायद आज हमें दुत्ती चंद, गीता फोगाट, हीमा दास की तरह बहुत से सितारे न मिल पाते जो हमारे देश के लिए एक सम्मान बन कर आये। व्यवसाय के क्षेत्र में भी ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जो ये बात सिद्ध करते हैं कि एक लड़की को कामयाब बनाने में उसकी मेहनत के साथ साथ उसके परिवार का साथ बहुत ही ज्यादा आवश्यक है। परिवार का साथ केवल पैसों से ही नहीं हो सकता उसमे परिवार के द्वारा मानसिक रूप से साथ खड़े होना सबसे ज्यादा आवश्यक है। मानसिक सहयोग मिलेगा तो ही कोई लड़की समाज में आगे बढ़ने से हिचकिचाहट नहीं महसूस करेंगी लेकिन वो मानसिक दृढ़ता सबसे पहले उसे अपने परिवार से ही मिलनी चाहिए।
अगर परिवार ही लड़की को घर से बाहर नहीं आने देगा तो क्या वो समाज में किसी और से सहारे की उम्मीद कर सकती है ? नहीं कभी नहीं। आज चाहे समाज में समृद्ध मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अम्बानी की बात करें या रोशिनी नाडार मल्होत्रा की, वो भी इस पहचान को इसलिए बना पाई क्योंकि उनके परिवार ने उन्हें आगे आने में साथ दिया।
अगर हम इतिहास के पन्नों को खंगालते हैं तो देखेंगे कि केवल समृद्ध परिवार में पैदा होने से ही लड़कियाँ पहचान नहीं बना पाती। बहुत से राज परिवारों में औरतों को पर्दे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जाती थी जबकि एक छोटे से माली परिवार में रहते हुए भी सावित्री भाई फुले ने पुणे में लड़कियों की शिक्षा के लिए सन 1848 में एक स्कूल शुरू किया था क्योंकि उसे शुरू करने में उनके पति ज्योतिराव फुले ने हर कदम पर उनका साथ दिया और ज्योतिराव फुले ने ही अपनी पत्नी को पढ़ने लिखने के लिए प्रेरित किया था। इस तरह के संसार में लाखों उदाहरण मिलेंगे जो दर्शातें हैं कि जीवन के हर क्षेत्र में लड़कियों को आगे लाने के लिए परिवारों के साथ का योगदान रहा है।
आज हमारा समाज पहले से अधिक विकसित माना जाता है लेकिन आज भी समाज में भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, महिलाओं को घर में रखने जैसी संकीर्ण मानसिकता उसी तरह से है जैसे कि आज से एक शताब्दी पहले। आज भी लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने के तुरंत बाद शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है जिससे उनके सपने सिर्फ सपने बन कर रह जाते हैं जो जिंदगी भर उनकी आंखों में आंसुओं के मोतियों में दिखाई देते हैं। हर एक समाज को विकसित करने के लिए एक औरत का सबसे बड़ा योगदान रहता है और वह योगदान घर की रसोई से लेकर देश को चलाने तक का होता है। आज राजनीति में भी लड़कियों का बहुत बड़ा योगदान है। बहुत से देशों में आज लड़कियां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हैं। राजनीति की बात की जाए तो पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी तथा पूर्व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी अपने आप में एक अलग पहचान रहीं हैं जिसका श्रेय इनके पिता और पति को भी जाता है जिन्होंने इन्हें इस मुकाम पर पहुंचने में सहयोग दिया।
एक लड़की को समाज में जगह बनाने के लिए उसके परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है क्योंकि सबसे पहले उसे अपने परिवार से लड़कर ही आगे आना होता है लेकिन अगर उसे उस लड़ाई की जगह उनका साथ मिले तो वह समाज में अपने लिए किसी से भी लड़कर आगे आ सकती है। यह जरूरी नहीं है कि परिवार की भूमिका हर जगह दिखाई दे लेकिन वो समाज में अदृश्य होने के बाद भी एक लड़की के लिए सबसे बड़ा दर्पण है।
एक लड़की के पैदा होने पर उसका परिवार में किस तरह स्वागत किया जाता है यहीं से उसके जीवन के असली सफर की शुरुआत हो जाती है जो दर्शाती है कि आने वाले समय में उसका परिवार किस तरह उसके साथ रहेगा ? किस तरह उसका रख रखाव होगा और वो शिक्षित हो पाएगी या नहीं ? आज समाज में लड़कियों के उत्थान के लिए बहुत सी सरकारें, संस्थाएं काम कर रही हैं लेकिन उनकी योजनाओं को तभी सार्थक किया जा सकता है अगर परिवार उन्हें सार्थक होने दे। अंत में मैं दो और उदाहरण देना चाहूंगा जिन्होंने परिवार के सहयोग से अपनी अलग ही पहचान बनाई है वो है भारतीय खाने की यूट्यूब पर दो मशहूर हस्तियां निशा मधुलिका और शिल्पी। इन दोनों के खाना बनाने के शौक को इनके परिवारों ने एक अलग पहचान दी और आज ये भारत की प्रसिद्ध फ़ूड यूट्यूबर हैं।
इसलिए लड़कियों को बोझ नहीं बल्कि गहना समझो जो वक़्त आने पर अपनी सुंदरता दिखाता है जो समाज में एक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। अगर हम लड़कियों को आगे लाने में साथ रहेंगे तो वो समाज में हमें एक अलग पहचान प्रदान करेगी।
वो देवी का स्वरूप भी है वो एक माँ का रूप भी है
साथ मिले जो परिवार का उसको वो खुद में ही अचूक भी है।











