बच्चों के बीच चाचा नेहरू कहलाने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। कहा जाता है कि पंडित नेहरू को बच्चों से इतना लगाव था कि हर साल 14 नवंबर को पूरा देश उनके जन्मदिन को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाता है। चाचा नेहरू का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था। उन्होंने शुरू से ही इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई की लेकिन कहते हैं उन्हें हिंदी से इतना प्यार था कि उसे सीखने के लिए वे गांव-गांव घुमते थे और लोगों के बीच में बैठकर हिंदी का सीखते थे।
बचपन के दिनों में चाचा नेहरू को उनके जन्मदिन पर तराजू में तौला जाता था। तराजू में बाट की जगह पर गेंहू या चावल के बोरे और कभी मिठाई तो कभी कपड़े रखे जाते थे। इसके बाद तौली हुई सामग्री को गरीबों में बांट दिया जाता था, जिससे उन्हें बहुत खुशी मिलती थी। एक बार की बात है चाचा नेहरू ने अपने पिता से कहा कि आप मेरा जन्मदिन साल में कई बार मनाया करिए ताकि इन लोगों को गेंहू , चावल, मिठाई मिल सके। चाचा नेहरू की इस बात से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे बचपन से ही कितने उदार थे।
अपने शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद चाचा नेहरू उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गये थे और वहां से लौटने बाद उन्होंने वकालत शुरू कर दी थी। लेकिन जब उन्होंने भारत में गुलामी का दौर देखा और अपने ही देश में लोगों को गुलामों की तरह जीते देखा तो उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने अपना मन बदल लिया और देश की आजादी के लिए गांधी जी के साथ उनकी लड़ाई में कूद पड़े।
साल 1919 में जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने स्वतंत्रता सेनानियों पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थी जिसकी वजह से वहां सैकड़ो लोगों की जान चली गयी थी। इस निर्मम हत्या के लिए साल 1920 में गांधी जी ने एक असहयोग आन्दोलन चलाया था, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी पूर्ण मनोयोग से हिस्सा लिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू हमेशा से ही गांधी जी के साथ मिलकर भारत को आजाद करने के लिए लड़ते रहे और स्वतंत्रता के बाद भी 1964 में अपनी मृत्यु तक देश की सेवा में लगे रहे।
पंडित जवाहरलाल नेहरू एक कुशल राजनीतिज्ञ के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी थे। स्वतंत्रता संग्राम के समय उन्होंने जेल में रहकर कई किताबें लिख डाली थी। ‘मेरी कहानी, विश्व इतिहास की झलक, भारत की खोज’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं।
चाचा नेहरू की एक खास बात थी कि वे हमेशा अपने कपड़ों में गुलाब का फूल लगाते थे। साल 1962 के आक्रमण के पहले जवाहरलाल नेहरू ने चीन की तरफ मित्रता का हाथ बढाया था, लेकिन चीन ने धोखा दे दिया जिसका चाचा नेहरू को बहुत बड़ा सदमा लगा था।
चाचा नेहरू के जन्मदिन पर भारत के हर स्कूल में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिसमें चाचा नेहरू पर भाषण प्रतियोगिता, कविताएं और नाटकों आदि के प्रोग्राम रखे जाते हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर बच्चों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और सुरक्षा की भी जानकारी दी जाती है।