Home Lifestyle क्या ज़रूरी है महिलाओं के लिए “सर्वगुण संपन्न” होना ?

क्या ज़रूरी है महिलाओं के लिए “सर्वगुण संपन्न” होना ?

photo courtesy- Ai generated images

हमारे समाज में जब किसी महिला की तारीफ़ की जाती है, तो अक्सर कहा जाता है—
“वह तो सर्वगुण संपन्न है।”
यानी वह अच्छी बेटी है, समझदार पत्नी है, आदर्श बहू है, जिम्मेदार माँ है, कामकाजी है, सुंदर है, संस्कारी है और हर किसी को खुश रखने की कला जानती है।

लेकिन सवाल यह है—
👉 क्या महिलाओं के लिए हर भूमिका में परफेक्ट होना सच में ज़रूरी है?
👉 क्या पुरुषों से भी यही उम्मीद की जाती है?

परफेक्शन का दबाव सिर्फ महिलाओं पर क्यों?

छोटी उम्र से ही लड़कियों को सिखाया जाता है—

  • ज़्यादा बोलो मत
  • हर रिश्ते को निभाना सीखो
  • सबका ध्यान रखो
  • अपनी इच्छाएँ बाद में देखना

धीरे-धीरे यह सीख जिम्मेदारी से बढ़कर दबाव बन जाती है।
महिलाओं से यह उम्मीद की जाती है कि वे हर हाल में संतुलन बनाए रखें— चाहे वे थकी हों, बीमार हों या मानसिक रूप से परेशान।

“सर्वगुण संपन्न” का टैग: सम्मान या बोझ?

ऊपर से देखने में यह टैग तारीफ़ जैसा लगता है, लेकिन अंदर से यह एक अदृश्य बोझ बन जाता है।
क्योंकि अगर महिला कभी थक जाए, नाराज़ हो जाए या ‘ना’ कह दे, तो उसे तुरंत कहा जाता है—
“तुम बदल गई हो”
“पहले जैसी नहीं रहीं”

यानी उससे यह अधिकार भी छीन लिया जाता है कि वह इंसान की तरह कमजोर हो सके।

महिलाएँ भी इंसान हैं, मशीन नहीं

महिलाओं से यह उम्मीद क्यों की जाती है कि वे हर रिश्ते में एडजस्ट करें?
क्यों उनकी गलती जल्दी दिखाई देती है, लेकिन उनकी मेहनत अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है?

सच यह है कि—
✨ महिला का मूल्य उसकी परफेक्शन से नहीं
✨ बल्कि उसकी सोच, संवेदनशीलता और आत्मसम्मान से तय होना चाहिए

खुद के लिए अधूरी होना भी ठीक है

हर महिला को यह समझने की ज़रूरत है कि—

  • हर दिन अच्छा होना ज़रूरी नहीं
  • हर रिश्ते में खुद को खो देना ज़रूरी नहीं
  • हर किसी को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी नहीं

कभी-कभी थोड़ा स्वार्थी होना भी आत्म-संरक्षण है।

समाज को क्या बदलना होगा?

समाज को यह स्वीकार करना होगा कि—
# महिलाएँ भी ग़लतियाँ कर सकती हैं
# वे थक सकती हैं
# वे अपनी प्राथमिकताएँ चुन सकती हैं

“अच्छी महिला” की परिभाषा अब बदलनी चाहिए।
अच्छी महिला वह नहीं जो सब कुछ सह ले,
बल्कि वह है जो खुद को समझे और सम्मान दे।

महिलाओं के लिए “सर्वगुण संपन्न” होना कोई ज़रूरी योग्यता नहीं है।
ज़रूरी यह है कि वे खुद से खुश हों,
अपनी पहचान बनाएँ
और यह जानें कि उनका अस्तित्व सिर्फ दूसरों को खुश करने के लिए नहीं है।

क्योंकि
🌸 एक खुश महिला, एक परफेक्ट महिला से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।

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Editor-in-Chief and Founder of CityWomenMagazine.in