ज़्यादा उम्र में शादी होना सोसाइटी में इतना बड़ा मसला क्यों है? इस मुद्दे पर सिटी वुमन मैगज़ीन ने बात की डॉ नरिंदर कौर। जोकि एक सोशल एक्टिविस्ट हैं। डॉ नरिंदर कौर अनंतशील फाउंडेशन नाम से एनजीओ भी चलाती हैं और वंचित महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए काम करती हैं।
लड़कियों की ज़्यादा उम्र में शादी होना है सोसाइटी में इतना बड़ा मुद्दा क्यों है ?
पैरेंट्स पर दबाव रहता ही है कि मेरी बेटी की शादी वक़्त से हो जाए। पेंतीस साल की हो गई है, शादी नही हो रही है, अच्छा लड़का नही मिलेगा, ये इशू रहता है पेरेंट्स के दिमाग मे। समाज मे लैट मैरेज को लेकर जो सोच है उसकी वजह से भी माता पिता पर दवाब बना रहता है।
अंडरप्रिविलेज फेमिली या बी पी एल फेमिली की सोच साफ़ है। बेटी पंद्रह सोलह साल की होते ही , उसके लिये लड़का देख कर उसकी शादी कर दो। उनको फोकस एडुकेशन पर नही रहता। उनको अपनी बेटी की शादी पर फोकस रहता है।
इसके अलावा आज के हमारे समाज मे महिलाओं और लड़कियों के साथ कई तरह के क्राइम हो रहे हैं। तो पेरेंट्स को वो भी एक डर है। तो अगर हम एक अंडरप्रिविलेज सेक्शन को लें तो जहाँ पर एडुकेशन को उतना महत्व नही दिया जाता।
लव मैरिज होना इसका कितना बड़ा कारण हो सकता है? एक सोच होती है फेमिली के अंदर की सोसाइटी में क्या बोलेंगे की लड़की अपनी पसंद के लड़के से शादी करेगी। तो उससे पहले वो इस सोच तक पहुंचे तीस को पार करे। उससे पहले ही उसकी शादी कर दी जाए।
आज की डेट में सोसाइटी में लोग ये समझ गए हैं कि सोसाइटी के नाम पर रिश्तेदार शादी में धूम धाम मचाने आते हैं खुशियों में शामिल होते हैं। लेकिन जब लड़कियां तलाक की स्टेज पर आती है तो उस सोसाइटी में से एक भी इंसान नही आता, उस लड़की को कोई फाइनेंशियल या मोरल सपोर्ट देने कोई नहीं आता। अभी भी कुछ माता पिता है जिनके लिए लव मैरिज एक टैबू है। हमारे समाज मे इन सभी विषयों पर खिचड़ी है। कुछ माता पिता को लव मैरिज से प्रॉब्लम नही होती। वो फिर उनकी बेटी फाइनेंशिअल स्टेबल हो या नहीं।
आज की लड़की अपने लक्ष्य को हासिल करना, करियर बनाना चाहती है। अगर वो यूपीएससी की परीक्षा पास करना चाहती हैं तो उम्र का बढ़ना लाज़मी है। लक्ष्य हासिल करने के बाद फिर वही लेट ऐज शादी वाला मुद्दा।
हाँ यह सब होता है और मैंने भी यह सब देखा है। ये सोच समाज में मौजूद हैं। महिलाएं जन्म से ही भावुक होती हैं। लेकिन आजकल वह मानसिक रूप से काफी स्थिर हो गई हैं। उसका लक्ष्य स्पष्ट है। अगर मैं यूपीएससी की परीक्षा पास कर लेती हूं, तो मैं आईएएस बन जाऊंगा और आईएएस से ही शादी करुँगी। जब एक महिला आगे बढ़ती है तो वह अपने क्षेत्र के अनुसार अपने करियर और परिवार की भी मदद करती है।
करियर और शादी की बात करें तो लव मैरिज और अरेंज मैरिज। इसमें लड़कियों को शादी का कॉन्सेप्ट बहुत साफ होता है। वे जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए, उनकी पसंद मायने रखती है। महिलाएं बहुत व्यावहारिक हो गई हैं।
जब शादी के लिए लड़के के लिए लड़की का पसंद किया जाता है। तो ख्याल रखा जाता है कि लड़की की उम्र लड़के से कम होती है। हर लड़का चाहता है कि उसे एक कुंवारी लड़की मिले। ऐसा क्यों ?इस समय जो जनरेशन गैप हो रहा है वो एक दो साल के स्पेन में हो रहा है। वो धीरे धीरे करके अपनी सोच को ग्रो कर रहे हैं। वंहा वर्जिनिटी लड़कियों के लिए भी एक टेबू नही रह गई है। और लड़के भी इस बात को समझते हैं। आजकल लड़के और लड़कियों इन सब बातों को लेकर काफी क्लियर हैं। अगर मुझे तुमसे शादी करनी है तो हम रेडी हैं लिव इन रिलेशनशिप के लिए। अगर सब कुछ ठीक नही हुआ तो मैं किसी और के साथ लिव इन मे जाऊंगा या जाउंगी। ये भी एक बड़ी वजह है की लेट मैरिज हो रही है। लिव इन मे ज्यादा जा रहे हैं। कॅरिअर पर ध्यान हैं। वर्जिनिटी टेबू नही है। महिलाएं जो पच्चीस तीस की अविवाहित हैं उनके लिये ये कोई समस्या नही रह गई है। हां पर पेरेंट्स को आपत्ति रहती है। पर धीरे धीरे पेरेंट्स भी ये सब एक्सेप्ट कर रहे हैं। आने वाले समय मे शादी के बिना बच्चे भी समाज मे अक्सेप्टबले हो जायेंगे।
30 से पहले शादी का जो दबाव है क्या इसका एक कारण शादी के बाद होने वाले बच्चे भी हैं। बच्चा अगर 30 के बाद होगा, तो लोगों को लगता है कि प्रेग्नेंसी में परेशानिया होती हैं, तो समय रहते शादी कर लेनी चाहिए।
हां महिलाएं चाहती हैं टाइम से शादी हो बच्चा हो। जिसकी वजह से जैसे ही वो तीस पेंतीस में आती हैं। उनको लगता है मुझे जल्दी से शादी करनी है। क्यूंकि उनका बायोलॉजिकल क्लॉक धीरे धीरे बदल रहा है। लोगों को पता है कि एक सही समय मे शादी करके वो अपनी फैमिली को आगे बढ़ा सकते हैं। आजकल लोग दिल से ज्यादा दिमाग से सोच रहे हैं। सब कुछ प्रेक्टिकल है पहले से तय कर लिया है।
हमारे देश मे कहा जाता है कि शादी सात जन्मों का बंधन है। इस पवित्र बंधन में आज भी लड़की की उम्र लड़के से छोटी होनी चाहिए ये इक्कीसवी सदी में कहां तक ठीक है?जो हमारे समाज के आदमी हैं। वो लोग इसे एक्सेप्ट कर रहे हैं। शादी में कंपेटैब्लिटी देखते है आजकल। कंपेटैब्लिटी मिलती है तो उम्र नही देखते। बॉलीवुड से हम बहुत प्रेरित होते हैं। जैसे हाल में ही नेहा ककड़ हैं। प्रियंका चोपड़ा है। सचिन तेंदुलकर की वाईफ हैं। जो उम्र में बड़ी हैं। तो इस समय मे शादी लेट मैरिज हो रही हैं। तो आजकल लेट मैरिज इतना बड़ा कारण नही रह गया है। हां लेकिन पांच साल पहले था। धीरे धीरे ये खत्म हो रहा है। लोग इसे अपना रहे हैं।जैसे आपने कहा शादी सात जन्मों का बंधन है, यहाँ शादी एक महीने नही चलती तो सात जन्म क्या चलेगी। आप तीस हजारी कोर्ट दिल्ली में चले जाइये वहां जज इतने परेशान हो गये हैं कि उन्होंने फेमिली कोर्ट के दो रूम बना लिये है। एक मेटर की डेट आती है आठ महीने में। क्योंकि वो कहते हैं तुम लोगों ने शादी की ओर आ गए कोर्ट में इसलिये पहले तुम आठ महीने एक दूसरे को झेलो फिर आना। जज भी परेशान है ज्यादा डिवोर्स के केस से। लेट मैरिज का जो मुद्दा है वो कंपेटैब्लिटी की वजह से है। जैसे जैसे आप ग्रो करते हो, आपका माइंड भी ग्रो होता है। और जैसे आप पेंतीस में आते है आपका मेच्योरिटी लेवल पच्चीस से ज्यादा हो जाता है। जिस हिसाब से सब बदल रहा है अविवाहित माँ भी समाज मे स्वीकार की जाएंगी।