कहते हैं मन में कुछ ठान लो तो भगवान में भी आपको कामयाबी के शिखर पर पुहंचाने के लिए साथ खड़ा होता है। चीजों को पाने में वक्त जरूर लगता है, लोग साथ कभी नहीं देते, लेकिन जब कामयाब हो जाते हैं तो दुश्मन भी दोस्त बनने के लिए हाथ बढ़ाने लगाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है तीसरी बार मिस वर्ल्ड डायवर्सिटी का खिताब अपने नाम करने वाली नाज जोशी की। इस उभरती ग्लैमरस वुमन ने “सिटी वुमन मैगज़ीन” से फ़ोन पर की खास बातचीत और शेयर किये हमारे साथ अपनी ज़िंदगी और कामयाबी के कुछ ख़ास एक्सपीरियंस।
View this post on Instagram
#missworlddiversity2019 #msworlddovsrsity2018 #msworlddiversity2017 It’s hatrick
खास है ग्लैमर्स इंडस्ट्री से जुड़ने का सफर
नाज ने सिटी वुमन से बातचीत करते हुए कहा कि एक लड़का और लड़की का मॉडलिंग और डिजाइनिंग इंडस्ट्री में सफलता पाना है, फिर भी आसान है, लेकिन एक ट्रांसजेंडर का इस प्लेटफॉर्म पर आना तब तक संभव नहीं है जब तक आपके पास कोई गॉड फादर न हो। क्योंकि बाकि लोगों के पास माता-पिता का साथ होता है, लेकिन हमें समाज और परिवार दोनों का ही तिरस्कार का सामना करना पड़ता है। जब मैंने मॉडलिंग की शुरुआत की तो सबने एक अलग नजरिए से देखा। नाज ने कहा 2009 में जब उन्होंने मॉडलिंग की शुरुआत की तो कोई भी उन्हें काम देने को तैयार नहीं था, इस स्थिति में उन्हें फ्री में सबके लिए काम किया और मुकाम हासिल करने के बाद खुद की कंपनी लॉन्च की।
समाज और ट्रांसजेंडर्स के बीच की दुरी को खत्म करना चाहती हैं नाज
नाज ने कहा कि वह इस वक्त समाज में महिलाओं, पुरुषों और ट्रांसजेंडर के बीच जो फासले को खत्म करना चाहती हैं। इसके लिए वह एक संस्था चला रही हैं। यह संस्था छोटे शहरों के ट्रांसजेंडर और महिलाओं के लिए काम कर रहे हैं।
माता-पिता का साथ जरूरी
नाज ने कहा कि ट्रांसजेंडर होना कोई अभिशाप नहीं है। अक्सर माता-पिता अपने ट्रांसजेंडर बच्चों को घर से बाहर निकाल देते हैं, क्योंकि वो समाज से डरते हैं। माता-पिता सोचते हैं कि उनके आसपास के लोग बच्चे के बारे में क्या कहेंगे। पर मैं उन लोगों से कहना चाहूंगी कि कोई भी समाज आपके साथ नहीं खड़ा होता है, जब आप बुरे वक्त में होते हैं तो आपके बच्चे साथ खड़े होते हैं। इसलिए किसी भी माता-पिता को ट्रांसजेंडर बच्चों को घर से नहीं निकलना चाहिए, उन्हें समझना चाहिए की जैसे एक लड़का या लड़की आपकी संतान है, वैसे ही ट्रांसजेंडर भी आपके परिवार का हिस्सा है। नाज ने कहा कि जब उन्होंने एक मुकाम हासिल कर लिया तब उनके माता-पिता ने उनका साथ दिया।
थोड़ा सा फिल्मों को बदलने की जरूरत है
नाज ने कहा कि फिल्मों में अक्सर ट्रांसजेंडर्स को डरवाना और अजीब तरीके से पेश किया जाता है, जो कि गलत है। अगर हम वाकई समाज में कई तरह के बदलाव की कोशिश करना चाहते हैं तो पहले रूपहले पर्दे को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि आज तक भी कई जगहों पर ट्रांसजेंडर के लिए नौकरियां नहीं है, जो शायद सबसे बड़ी समस्या है। अगर हम चाहते हैं कि ट्रांसजेंडर वाकई कुछ कर दिखाए तो नौकरियों में भी उनकी मदद करनी होगी।
समाज के नजरिए को बदलने के लिए नाज कई ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा, सैनेटरी नैपकीन जैसी गंभीर मुद्दों पर काम कर रही है। इसके साथ ही नाज ने एक बेटी भी गोद ली हुई है। अपनी कमजोरियों को शक्तियों में परिवर्तित करो और आकाश की सीमाओं को छुओ, यही नाज़ का कहना है। उनका उद्देश्य उन लोगों को भी खुशी का बांटना है, जिन्होंने शायद उस वक़्त उनकी मदद नहीं की, जिस वक़्त वो मुसीबत में थीं और उन्हें समर्थन की सबसे ज़्यादा ज़रुरत थी।










