
कई बार स्टार्स को अपने बच्चों के साथ योगा करते हुए देखा जाता है। जब स्टार्स अपने बच्चों के साथ योग करते हुए वीडियोज और फोटोज को शेयर करते हैं तो अक्सर पैरेंट्स के मन में सवाल आता है कि क्या बच्चों को वाकई योगा करवाना चाहिए? अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो इसका जवाब है हां।
कोरोना वायरस ने जिस तरह से बच्चों को प्रभावित किया है उससे उनके डेवलपमेंट पर काफी असर पड़ा है। कोरोना के कारण होम स्कूलिंग, दोस्तों और पड़ोसियों से दूर हो जाने, ऑनलाइन क्लासेस, आउटडोर गेम्स और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बच्चों को घुलना-मिलना लगभग शून्य हो गया है ऐसे में बच्चे मानसिक तनाव महसूस न करें इसके लिए योग जरूरी है।
योग की खास बात ये है कि आपको शारीरिक और मानसिक दोनों तरीके से तैयार करता है। योग करने से भावनात्मक स्थिरता आती है और मन शांत रहता है। जो बच्चे 8, 9 या 10 साल की उम्र में योगा करना शुरू कर देते हैं उन्हें टीनएज में होने वाले इमोशनल उतार-चढ़ाव को संभालने में आसानी होती है। तो आइए जानते हैं बच्चों को योगा करवाने के अचूक फायदों के बारे में…
– रोजाना बच्चों को योग करवाने से शरीर में फुर्ती, लचीलापन, संतुलन और शक्ति आती है।
-योग बच्चों को मानसिक तौर पर शांत रहने और बुरी परिस्थितियों में कैसे खुद पर काबू पाया जाए इसके लिए तैयार करता है।
-योग बच्चों को अनुशासन के बारे में सिखाता है और उन चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं।
-प्रतिदिन योग करने से बच्चे के दिमाग का विकास बेहतर होता है और उसकी याद्दाश्त तेज होती है। जिन बच्चों को पढ़ाई के वक्त फोकस (कॉन्सन्ट्रेशन) करने में प्रॉब्लम आती है उन्हें खास तौर पर योग करने की सलाह दी जाती है।
– योग से बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और इससे वे बीमारियों से बच पाते हैं।
-जिन बच्चों को बहुत गुस्सा आता हैं उनके गुस्से को नियंत्रित करने में योग बहुत फायदेमंद है।
किन बातों का रखें ध्यान
-बच्चों को योगा करवाना भी पैरेंट्स के लिए एक टास्क है, क्योंकि इस दौरान हमें छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखना होगा।
-योगासन कराने से पहले ध्यान रहे कि बच्चा खाली पेट हो। अगर बच्चा खाना खाकर योग करेगा तो इससे उसके शरीर को नुकसान हो सकता है।
– बच्चे को नियमित तौर पर योग करवाना जरूरी है। यानि की सप्ताह के कम से कम 5 दिन बच्चे को योग करवा पाएं तभी इसकी आदत डालें।
– योग के दौरान बच्चे को शुरुआत में ही सब कुछ एकसाथ ना करवाएं। शुरुआत में 15 मिनट के सेशन करें। एक सप्ताह के बाद सेशन के वक्त को 30, फिर 40 और उसके बाद 1 घंटा किया जा सकता है।










