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रिद्धि दोषी – सोशल मीडिया पर बिज़ी पेरेंट्स और अकेला महसूस करते बच्चे

Vitolda Klein/Unsplash
फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सअप का क्रेज इन दिनों हर किसी के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। जब मां या पिता सोशल नेटवर्किंग साइट में बिजी रहता है तो बेबी क्या महसूस करता है और बेबी का उस पर क्या प्रभाव पड़ता है इस पर सिटी वुमन मैगजीन से बातचीत की चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट रिद्धि दोषी से।
रिद्धि दोषी ने बताया कि 2 से 3 साल के बच्चे के पेरेंट्स जब सोशल मीडिया यूज करते हैं तो बच्चे खुद को अकेला महसूस करते है। 2 से 5 साल के बच्चों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बेबी को ज्य़ादा केयरिंग और प्यार की जरूरत होती है, जब मां सोशल मीडिया पर बिजी रहती हैं तो उसे वो प्यार नहीं मिलता है। जिससे बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा बढता है जो उनके मैंटली लेवल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
जब माता-पिता ही पूरा दिन सोशल मीडिया बिजी रहेंगे तो बच्चों में भी वही मैसेज जाएगा। बच्चा खुद कभी बाहर निकलना ही नहीं चाहेगा, ना ही लोगों से मिलेगा, क्योंकि उसके पेरेंट्स ही ऐसा नहीं करते हैं। जब बच्चे बाहर निकलेंगे ही नहीं तो उनका मानसिक विकास प्रभावित होगा।
एक केस का जिक्र करते हुए रिद्दी ने बताया कि वो एक मीटिंग में गई थी और एक महिला से बातचीत कर रही थी। वो महिला रिद्धि दोषी से सही तरीके से बातचीत कर सके इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को आईपैड दे दिया। ऐसी कई मॉम हैं जो अपने काम को निपटाने के लिए बच्चों को टीवी, मोबाइल में बिजी कर देते हैं, जो कि गलत है। ऐसा करने से आपके बच्चों में एक गलत मैसेज जाता है। बच्चों को लगता है कि उनके पेरेंट्स उनसे झूठ बोल रहे हैं, जाहिर सी बात है जब उन्होंने ऐसा लगेगा तो वो भी ऐसा ही करेंगे।
क्या है उपाय
अगर एक माता पिता को एक वक्त के बाद ये ख्याल आता है कि अगर उनके बच्चों के साथ गलत हो रहा है तो वो पहले खुद में बदलाव लाए। खुद सोशल मीडिया की लत को छोड़, बच्चों को वक्त दें, उनसे दोस्तों, स्कूल, टीटर्स के बारे में पूछे। अगर संभव हो तो घर में एक रीडिंग कॉर्नर बनाएं।
रिद्धि दोषी का कहना है कि अगर एक मॉम वर्किंग है तो घर वापस आने के बाद बच्चों को पहले प्यार करना चाहिए। उसे गले से लगाना चाहिए। ताकि उसको लगेकि अब जो भी वक्त है वो उसका है।
बच्चों को टाइम ना देने वाले पेरेंटस के बारे में उन्होंने कहा कि इसका नतीजा टीन ऐज में देखने को मिलाता है। उस वक्त बच्चा उनसे ना तो कुछ शेयर करेगा और ना ही चाहेगा कि उसकी लाइफ में कोई दखल अंदाजी करें। 15 से 20 साल की वो उम्र होती है जब बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो रहा होता है। बचपन में वक्त ना मिलने के कारण बच्चा नशे या अन्य गलत चीजों का शिकार हो सकता है।
इसलिए जरूरी है कि एक पेरेंट्स खुद को बदलें, क्योंकि एक बच्चे के लिए उसके पेरेंट्स की आइना हैं। वो जो कुछ उन्हें करते देखेगा तो वो भी वही दोहराने की कोशिश करेगा।
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