
ज्यादातर पेरेंट्स की आम परेशानी है कि उनका बच्चा बहुत जिद्दी हो गया है। कभी मार्केट जाओ तो बच्चे की डिमांड बढ़ जाती है। बच्चे जोर जोर से रोने लगते हैं या फिर कुछ बच्चे तो जमीन पर ही लेट जाते हैं।
किसी भी माता-पिता के लिए बच्चों का जिद्दीपन, गुस्सा और उनका नखरा निराशाजनक और कई बार अपमानजनक हो सकता है। लेकिन बच्चों की इस हरकत को आपदाओं के रूप में देखने के बजाय, उनके नखरों को एक सीखाने के अवसर में बदलें।
बच्चों में नखरे या जिद्द क्यों होती हैं?
बच्चों में गुस्से के दौरान नखरे, रोने और रोने से लेकर चीखने, लात मारने और सांस रोकने तक होते हैं। वे लड़कों और लड़कियों में समान रूप से आम हैं और आमतौर पर 1 से 3 साल की उम्र के बीच यह आस्वाभाविक होता है।
कुछ बच्चों में अक्सर नखरे हो सकते हैं, और कुछ दूसरों बच्चों के पास शायद ही कभी ये लक्षण दिखें। नखरे बाल विकास का एक सामान्य हिस्सा हैं। इस तरह छोटे बच्चे दिखाते हैं कि वे परेशान या निराश हैं।
जब बच्चे थके हुए, भूखे या असहज महसूस करते हैं, उस समय वो ज्यादा जिद्दी या नखरे दिखते हैं। छोटे बच्चों में यह आम बात होती है। 2 -3 साल के बच्चे जब बोलना सीखते हैं, तो वह सबकुछ हमें बता नहीं सकते कि उनको कुछ परेशानी है, तब वह रोने और चिल्लाने लगते हैं। लेकिन बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वो सब कुछ खुद से करना चाहते हैं। वो सोचते है कि “मैं इसे खुद कर सकता हूं” या “मुझे यह चाहिए, मुझे दे दो।” जब बच्चों को पता चलता है कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, तब वह उस स्थिति से निपटने के लिए जिद्द, नखरे और रोने का सहारा लेते हैं।
बच्चों के जिद्दी सवभाव से कैसे बच सकते हैं?
जब भी संभव हो, किसी भी जिद्द को शुरू में ही उसे होने से रोकने की कोशिश करें। बच्चों को निराशा से निपटना सीखना एक अच्छा कौशल है, जिसे बच्चे समय के साथ सीखते हैं।
1. भरपूर सकारात्मक ध्यान दें – अपने बच्चे को अच्छा बनने के लिए हमेशा अच्छी आदत डालें। पॉजिटिव बिहेव (सकारात्मक व्यवहार) के लिए अपने बच्चे को कुछ गिफ्ट दें और तारीफ करें।
2. बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर थोड़ा कंट्रोल करें – उनको ऑप्सन दे जिसमे से वो कुछ सेलेक्ट कर सकें जैसे कि “क्या संतरे का रस या सेब का रस चाहिए?” या “क्या आप नहाने से पहले या बाद में दाँत ब्रश करना चाहते हैं?” इस तरह से कुछ भी हो सकता है।
3. ऑफ-लिमिट ऑब्जेक्ट्स को पहुंच से बाहर रखें – बच्चों को शुरुआत में ही सब कुछ नहीं दिया जा सकता। इसलिए उनको इनसब चीजों से दूर रखना अच्छा उपाय हो सकता है। पर यह हमेशा संभव नहीं होता है, खासकर घर के बाहर जहां परिस्थिति आपके कंट्रोल में नहीं होती है।
4. बच्चे को डिस्ट्रैक्ट करें – अपने नन्हे-मुन्नों के ध्यान की कमी का फायदा उठाएं, जो उनके पास अभी कम है। उनकी डिमांड के बदले में कुछ और पेश करें। अपने बच्चे को बाहर या घर के अंदर किसी दूसरे कमरे में लेकर चले जाएं।
5. बच्चों को नए स्किल्स सिखाएं – बच्चों को कुछ करे सीखने में मजा आता है। वे जो कर सकते हैं, उस पर गर्व महसूस करने में उनकी मदद करने के लिए उनकी तारीफ करें। इसके अलावा, अधिक कठिन कामों पर आगे बढ़ने से पहले कुछ सरल काम से शुरुआत करें।
जब आपका बच्चा कुछ चाहता है, तो उसपर ध्यान से विचार करें। बिना सोचे समझे उसे डांटे नहीं। अपने बच्चे की सीमाओं और कमियों को जानें। यदि आपको पता है कि आपका बच्चा थका हुआ है, तो उसे किराने की खरीदारी पर साथ ले जाने या कुछ और काम से बचें। ऐसा करने से आप बच्चे के चिड़चिड़े पन या उसकी किसी जिद्द से बच सकते हैं।










