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क्या आपके घर में भी बच्चों को कहानी सुनाने की ज़िम्मेदारी टीवी – मोबाईल की है ?

BEDTIME STories play a major role in your kids life
Photo : McKaela Taylor

आप ये बात माने या न माने पर ये सच है कि छोटे बच्चों की ज़िंदगी में कहानियों का बहुत अहम रोल होता है। बच्चों को एक पल के लिए कुछ बातें भाषण लग सकती हैं। पर जब आप उन्हीं बातों को उन्हें किस्से कहानियों के ज़रिए सुनाते हैं तो उसका उनपर ज़्यादा असर होता है।

याद है बचपन में वो नानी – दादी से कहानी सुनना ? कितना अच्छा लगता था वो कहानियां सुनकर। कहानी के किरदार अच्छे और बुरे की पहचान तो कराते ही थे। साथ ही सही – गलत बात की सीख भी देते थे।

आज परिवार छोटे होने का सबसे बुरा असर सबसे ज़्यादा छोटे बच्चों पर पड़ा। माता – पिता दोनों की नौकरी और बिज़ी लाइफ ने कहानियों के इस खूबसूरत पल को निगल लिया।

कई बच्चों घरों में बच्चों को कहानी सुनाने की ज़िम्मेदारी टीवी, मोबाईल लैपटॉप और एलेक्सा ने ले ली। एक बार सोच के देखिये हम माता पिता अपने समय के लिए किस तरह बच्चों को किस तरह एडवांस तकनीक के हवाले कर रहे हैं।

कई माताएं अक्सर मुझसे कहती हैं की बच्चे बात नहीं सुनते। बहुत समझाती हूँ पर उसके दिमाग में कोई बात नहीं जाती। ऐसे माता पिता के लिए एक ही जवाब है – बच्चे को क्वालिटी समय दीजिये। रात को सोने से पहले बच्चे को बेड टाइम स्टोरीज (कहानियां) ज़रुरु सुनाये। अगर आपको कहानियां नहीं आती है तो कोई बात नहीं आप किताबों का सहारा ले सकते हैं।

सच मानिए कहानियां सबसे मजेदार और आसान तरीका होता है बच्चों की सही समय पर सही परवरिश का। उन्हें सही गलत समझाने का। उन्हें एक अच्छा डिसीजन मेकर बनाने का। क्यूंकि कहानियां हमेशा उनके आगे दो ऑप्शन (विकल्प) रखती है और कहानी का अंत उसे सही को चुनने में मदद करता है।

इसलिए आज से ही अपने बच्चे को रोज़ रात को 1 कहानी ज़रूर सुनाए। कहानी सुनाने के साथ आप अपने बच्चे को जो वक़्त देंगे ये समय आपके और बच्चे के बीच रिश्ते को भी मज़बूत बनाएगा।

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Editor-in-Chief and Founder of CityWomenMagazine.in