Home Kids Corner बच्चों के दिमागी और भावनात्मक विकास में कला की भूमिका

बच्चों के दिमागी और भावनात्मक विकास में कला की भूमिका

ड्रॉइंग, म्यूज़िक, डांस और क्राफ्ट क्यों हैं बच्चों की सही ग्रोथ के लिए ज़रूरी

kid and art
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क्या आपने कभी सोचा है कि जब बच्चा दीवार पर टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें बनाता है या गाने की धुन पर बेझिझक नाचने लगता है, तो वह सिर्फ शरारत या मस्ती नहीं कर रहा होता? उस पल उसका दिमाग नई चीज़ें सीख रहा होता है, भावनाएँ बाहर आ रही होती हैं और अंदर ही अंदर उसका आत्मविश्वास बन रहा होता है। कला बच्चों के लिए खेल जैसी लगती है, लेकिन असल में यह उनके दिमाग, दिल और व्यक्तित्व को आकार देने वाली एक ताकतवर प्रक्रिया है। रंग, संगीत और रचनात्मकता मिलकर बच्चों को सिर्फ व्यस्त नहीं रखते — वे उन्हें अंदर से खुश, संतुलित और मजबूत बनाते हैं।

कला बच्चों के लिए सिर्फ टाइमपास नहीं है, बल्कि उनके पूरे विकास की मजबूत नींव है। जब बच्चे रंगों से खेलते हैं, गाना गाते हैं, नाचते हैं या मिट्टी से कुछ बनाते हैं, तो उनका दिमाग तेजी से सीख रहा होता है। ऐसी रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों की सोचने की क्षमता बढ़ाती हैं, उनकी याददाश्त मजबूत करती हैं और उन्हें ध्यान लगाना सिखाती हैं। कला बच्चों को बिना दबाव के सीखने का मौका देती है, इसलिए वे इसे मज़े से करते हैं और धीरे-धीरे कई जरूरी स्किल्स खुद ही विकसित हो जाती हैं।

कला बच्चों की भावनाओं को समझने और संभालने में भी बहुत मदद करती है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी फीलिंग्स शब्दों में नहीं बता पाते, लेकिन ड्रॉइंग, रंगों या म्यूज़िक के जरिए वे अपने मन की बात बाहर निकाल देते हैं। इससे उनका मन हल्का होता है और गुस्सा, डर या उदासी कम होती है। जो बच्चे नियमित रूप से आर्ट करते हैं, वे आम तौर पर ज्यादा शांत, खुश और भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। कला उनके अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ाती है, क्योंकि जब वे कुछ बनाते हैं, तो उन्हें खुद पर गर्व महसूस होता है।

हर उम्र में कला का फायदा अलग तरह से दिखता है। छोटे बच्चों में यह हाथ–आंख का तालमेल और छोटी मांसपेशियों की ताकत बढ़ाती है। थोड़े बड़े बच्चों में भाषा, कल्पनाशक्ति और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता बेहतर होती है। प्री-टीन और टीनएज बच्चों के लिए कला तनाव कम करने का एक सुरक्षित तरीका बन जाती है, जहां वे अपनी उलझी हुई भावनाओं को बाहर निकाल सकते हैं। इस तरह कला बच्चों को मानसिक रूप से संतुलित और मजबूत बनने में मदद करती है।

माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे बच्चों को खुलकर रचनात्मक होने दें। इसके लिए महंगे क्लास की जरूरत नहीं, घर पर कागज, रंग और थोड़ा समय काफी है। बच्चों को यह मत बताइए कि क्या सही है और क्या गलत — उन्हें अपने तरीके से बनाने दें। उनके काम की तारीफ करें, चाहे वह आपको समझ आए या नहीं। जब बच्चे बिना डर के खुद को व्यक्त करते हैं, तभी उनकी असली ग्रोथ होती है। कला बच्चों को सिर्फ क्रिएटिव नहीं बनाती, बल्कि उन्हें अंदर से खुश, आत्मविश्वासी और मजबूत इंसान बनाती है।

कला बच्चों के लिए कोई एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं है। यह उनके दिमाग, दिल और आत्मविश्वास को मजबूत बनाने का प्राकृतिक तरीका है। हर ड्रॉइंग, हर गाना और हर डांस स्टेप उनके भविष्य को बेहतर बना रहा होता है। तो अगली बार जब बच्चा दीवार पर रंग लगा दे या तेज आवाज में गाना गाए, तो डांटने से पहले एक बार सोचिए — वह सीख रहा है, बढ़ रहा है और खुश रहना सीख रहा है। कला बच्चों को सिर्फ क्रिएटिव नहीं बनाती, बल्कि उन्हें अंदर से मजबूत, भावनात्मक रूप से संतुलित और खुश इंसान बनाती है।

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Editor-in-Chief and Founder of CityWomenMagazine.in