
आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लीजिए पेरेंटिंग में परफेक्शन आना मुश्किल है. पुरानी कहावत है कि इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है. इंसान को वक्त के साथ खुशियां, दुख मिल सकते हैं, लेकिन परफेक्शन नहीं. यही रूल पेरेंटिंग पर भी लागू होता है. घर, ऑफिस, फैमिली, फाइनेंस, एजुकेशन, बच्चों का फ्यूचर पेरेंटिंग में सबकुछ पर एक साथ फोकस करना होता है. ऐसे में अक्सर लोग इमोशनली थक जाते हैं. इसीलिए आज हम आपको पेरेंटिंग ने उन 2 गोल्डन रूल्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी लाइफ में रिलेक्स लेकर आएंगे.
पेरेंटिंग रूल 1 – क्वॉलिटी टाइम की है वैल्यू
हर बच्चा अपने पैरेंट्स की अटेंशन चाहता है. आप अपने बच्चे के साथ कितना वक्त बीता रहे हैं इससे ज्यादा जरूरी है कि कितना क्वॉलिटी टाइम स्पेंड किया जा रहा है. इसीलिए बच्चों के साथ वक्त बीतते समय मोबाइल, लैपटॉप, टीवी जैसे गैजेट्स से दूर रहें. बच्चों के साथ खेलें, हंसे, उन्हें अपनी कहानी सुनाएं, उनके दोस्तों के किस्से सुनें. ऐसा करने से बच्चों के साथ आपकी बॉन्डिंग स्ट्रांग होगी और बच्चा आपसे बे-हिचक अपने मन की बात कह सकेगा.
पेरेंटिंग रूल 2 – आपको देखकर ही सीख रहा है
अक्सर पैरेंट्स बच्चों को डिसिप्लिन में रहना सिखाता हैं, लेकिन खुद पर ये लागू करना भूल जाते हैं. अगर आप चाहते हैं आपका बच्चा फ्यूचर में कुछ अच्छा करें तो आपको उसके सामने पॉजिटिव रहने की जरूरत है. फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना, बड़ों से कैसे बात करनी है, दूसरों की फीलिंग्स की केयर करना, किसी के साथ कितना इमोशनली कनेक्ट करना है ये बच्चा सबकुछ आपसे ही सीखता है.
इसीलिए बच्चे को डांटने से पहले कहीं आप खुद तो वही गलती नहीं कर रहे हैं इस बात को ध्यान में रख लीजिए.










