
वंदना सिंह प्रयागराज जिले के सोरांव शहर में एक इंटर कॉलेज की अंग्रेजी की टीचर हैं जो ‘पैड वुमन’ के नाम से मशहूर हैं। वंदना अपने साथ हमेशा कुछ सैनिटरी पैड साथ रखती हैं और वह इनको ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों के बीच बांटती है।
वंदना ने चार साल पहले अपनी एक महिला रिश्तेदार को मेंस्ट्रुअल हाईजिन की कमी की वजह से खो दिया था। तब से उन्होंने अपने आसपास की महिलाओं और लड़कियां को इसके बारे में जागरूक करना शुरू किया। वंदना अब हर महीने अपने वेतन का लगभग 10 प्रतिशत सैनिटरी पैड खरीदने में खर्च करती हैं।
Vandana Singh lost a relative due to a lack of adequate menstrual hygiene four years ago. This prompted her to launch a battle to spread awareness and thereby, save lives.https://t.co/FhBNfOmzwf#womenincharge #menstruation #indianwomen #healthandwellbeing #SexnotGender pic.twitter.com/nOBLq1L7Yq
— WDI India (@INDIAWDI) October 19, 2021
वंदना के इस काम को शहर के कई सारे अख़बारों ने सराहा है। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा, “मासिक धर्म के दौरान उचित स्वच्छता की कमी से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। जब मैंने ग्रामीण महिलाओं के बीच सैनिटरी पैड बांटना शुरू किया, तो लोग मेरा मजाक बनाते थे। मैं ग्रामीण महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागृत कर रही हूँ और उन्हें मुफ्त में सैनिटरी पैड बांटती हूँ।”
वंदना ने आगे बताया कि अब भी अक्सर हमारे देश के छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और लड़कियां में मासिक धर्म की स्वच्छता के बारे में जागरूकता नहीं हैं और हमें इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
वंदना ने जब इस क्षेत्र की महिलाओं की काउंसलिंग शुरू की तो कुछ लोगों ने उनके काम की निंदा की और भद्दे कमेंट्स भी किए। पर उन्होंने हार नहीं मानी और एक महिला होने के नाते वह अपनी जैसी और महिलाओं को इस तरह की बात के लिए जागरूक करती रहीं, ताकि कोई और किसी अपने को न खो पाए। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम जारी रखा और धीरे-धीरे उनका यह प्रयास सफल होने लगा।
उन्होंने महिलाओं को सैनिटरी पैड बनाने और प्रशिक्षित करने के लिए पांच सिलाई मशीनें अपने पैसे से खरीदी। वह इस तरह का प्रयास प्रयागराज के हर गांव में करना चाहती हैं। उनके इस पहल का और विस्तार करने की योजना है।
वंदना सिंह, सोरांव शहर में अब तक 1.25 लाख से अधिक सैनिटरी पैड बाँट चुकी हैं और उनका लक्ष्य 5 लाख का आंकड़ा छूने का है।
गांव की महिला और लड़कियों को हर महीने इस ‘पैड वुमन’ के आने का इंतजार रहता है और वंदना सिंह अब सप्ताह में उनको एक बार में 500 से 1,000 पैड देती हैं।










