
बॉलीवुड में जाना, नाम, पैसा और सोहरत कमाना कौन नहीं चाहता। लेकिन एक ऐसी सिंगर है जो लोगों की हेल्प करने के लिए सिंगर बनी। और कहते हैं, ना लोगों की दुआ में बड़ा असर होता है। आज वो बॉलीवुड के जाने-माने सिंगरों में से एक हैं।
पलक मुच्छल ने चैरेटी करने के लिए सिंगिंग की शुरुआत की। पलक मुच्छल का जन्म 30 मार्च, 1992 को मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर शहर के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। उनके पिता राजकुमार मुच्छल एक निजी संस्था में लेखक के रूप में काम करते हैं, और इनकी मां अमिता मुच्छल हाउसवाइफ है। पलक का एक छोटा भाई है पलाश जो बॉलीवुड का यंगेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर है।
पलक ने चार साल की उम्र में गाना शुरू किया। स्कूल के एक शो में उन्होंने लता जी का गाना गाया। उनके पेरेंट्स को लगा कि पलक आगे चलकर अच्छी सिंगर बन सकती है। इसलिए उन्होंने बचपन से ही पलक को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दिलवाई। “कल्याणजी आनंदजी लिटिल स्टार” जो उभरते गायकों का इंदौर शहर में एक समूह था, पलक चार साल में उसकी सदस्य बनीं।
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जब 1999 में भारत पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध छिड़ा, और भारतीय सैनिक अपने देश के लिए प्राणों की आहुति दे रहे थे। तब 7 साल की पलक ने शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए इंदौर शहर में दुकानों के सामने गाना गाकर चंदा जमा करना शुरू किया। उनके इस प्रयास की भारतीय मीडिया में काफी चर्चा हुई। पलक ने उस समय 25 हजार रुपयों का चंदा इक्कठा किया। उसी साल जब उड़ीशा राज्य चक्रवात की चपेट में आया, तब उन्होंने पीड़ितों की सहायता के लिए चंदा इकट्ठा किया।
एक दिन पलक ट्रेन में सफर करते हुए, देखा कि गरीब और असहाय छोटे बच्चे, अपने बदन के कपड़ों से ट्रेन के डिब्बे साफ कर रहे थे। तब उन्होंने उन गरीब बच्चों की मदद करने का मन बनाया। कुछ महीनों बाद इंदौर के निधि विनय मंदिर स्कूल के शिक्षकों ने अपने छात्र लोकेश के मदद के लिए पलक से संपर्क किया। लोकेश दिल की बीमारी से पीड़ित, एक दिन महज 50रुपए कमाने वाले लोकेश के पिता बहुत गरीब थे और लोकेश के दिल के ऑपरेशन का खर्चा ₹80000 था। शिक्षकों ने पलक से अपने गानों के जरिए चंदा जमा करने की विनती की। उनका सम्मान करते हुए पलक ने मार्च 2000 में पब्लिक प्लेस में गाने की शुरुआत की। इसके जरिये उन्होंने लोकेश के ऑपरेशन के लिए ₹51 हजार रुपयों का चंदा इकट्ठा किया। उनके इस प्रयास की टेलीविज़न पर काफी चर्चा हुई और बेंगलुरु के एक डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी ने ऑपरेशन मुफ्त करने की पेशकश की।
बचे हुए चंदे का सदुपयोग करने के लिए पलक के माता-पिता ने अखबार में इश्तहार दिया। ताकि लोकेश जैसे किसी बच्चे के दिल का ऑपरेशन के लिए चंदे का उपयोग हो सके। तब 33 बच्चों के माता पिता ने उनसे संपर्क किया। इसके चलते पलक ने उस साल कई सार्वजनिक प्रदर्शन का आयोजन किया और ढाई लाख रुपयों का चंदा इकट्ठा किया। जो बंगलौर और इंदौर के अस्पतालों में 5 बच्चों के दिल के ऑपरेशन के लिए खर्च किया गया। पलक के इस प्रयास में इंदौर के एक अस्पताल ने सहयोग करते हुए ऑपरेशन की फीस घटाकर आधी कर दी और एक सर्जन धीरज गांधी ने फीस न लेने का फैसला किया।
सन् 2000 से पलक ने अपने भाई पलाश के साथ चंदा इकट्ठा करने के लिए देश-विदेश में कई सांग प्रदर्शनों का आयोजन भी किया है। अपने अभियान से प्रेरणा लेते हुए पलक ने अपने सांग टूर का नाम “दिल से दिल” तक रखा है। पलक ने 2001 में गुजरात के भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए दस लाख के चंदा इकट्ठा किया। जुलाई 2003 में पलक ने पाकिस्तानी नागरिक बच्ची जो दिल की बीमारी से पीड़ित थी,और भारत में ईलाज के लिए आई थी, उसकी भी सहायता की। दिसंबर 2006 तक कुल 1.2 करोड़ों की राशि इकट्ठा की और कई बच्चों का ऑपरेशन किया गया।
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पलक मुच्छल हार्ट फाउंडेशन नाम से उन्होंने एक संस्था की शुरुआत की। पलक ने 2011 में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और उनका यह सफर अभी भी जारी है। मई 2013 तक उन्होंने पलक मुच्छल हार्ट फाउंडेशन के लिए तकरीबन ढाई करोड रुपए की राशि जमा की। इसमें 572 बच्चों का ऑपरेशन हो सका और उनकी जान बचाई जा सकी और पलक के प्रयास जारी हैं।
पलक बचपन से ही बॉलीवुड में एक प्लेबैक सिंगर बनना चाहती थी। 2001 में जब 9 साल की थी, तब उनकी पहली एल्बम ‘चाइल्ड फॉर चिल्ड्रन’ रिलीज़ हुआ। 2006 में बॉलीवुड में अपना सिंगिंग करियर बनाने के लिए वह इंदौर से मुंबई चली गई। 2011 में हिंदी फिल्मी दुनिया में सिंगर के रूप में कदम रखा और बॉलीवुड में पहला गाना फिल्म दमादम के लिए गाया। हिमेश रेशमिया के म्यूजिक में बने लगभग हर गाने को पलक ने गाया है।
पलक मुच्छल बॉलीवुड में अपनी सफलता का श्रेय सलमान खान को देती हैं। शुरूआती दौर में पलक को श्रेया घोसाल का डुप्लीकेट कहा जाता था, क्यूंकि दोनों की आवाज कुछ हद तक एक जैसी थी। लेकिन समय के साथ, उनकी फैमिली का सपोर्ट, और लाखों दुआयों ने पलक को सबसे अलग बना दिया।
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