
यह रीटा जी है। इनकी उम्र 52 साल है। इनकी शादी को 35 साल हो गए हैं। यह एक ग्रहणी के रूप में अपने घर पर कामकाज करती रहती थी। पर एक कमी इनको बहुत महसूस होती थी वो है बच्चे की, क्योंकि इनके बच्चे नही हैं , इसलिए कभी-कभी बहुत उदास भी रहती थी।
एक दिन इन के पड़ोस में रहने वाले किसी महिला ने इनको सम्भली ट्रस्ट के द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के बारे में बताया। संभली ट्रस्ट 2007 में शुरू हुआ और रीता जी 2010 में सिलाई-सिलाई और कढ़ाई सीखने के लिए सशक्तिकरण केंद्र में शामिल हुईं
इन्होंने उसी दिन जाकर अपना नाम लिखवाया। और सिलाई कसीदे सीखने लगी। उन्होंने अपना एक साल का कोर्स पूरा किया और फिर संभली से एक प्रमाण पत्र और उपहार के रूप में सिलाई मशीन प्राप्त की कुछ ही समय में सिलाई और कसीदे सीखने के बाद वो घर से सिलाई करने के लगीं। जिससे इनको आमदनी भी होने लगी।
घर में सिलाई करने के साथ ही उन्होंने सम्भली ग्रेजुएट सेंटर में आकर विदेशी ऑर्डर को पूरा करने में भी अपना योगदान देना शुरू किया जिसका इनको मेहनताना भी मिलने लगा। यह अपने समय का सदुपयोग करने लगी और खुश रहने लगी इनको यहां खुशियां मिलने लगी क्योंकि इनसे ही कम उम्र की लड़कियों को यह मां की तरह प्यार करती थी और उनको काम भी सिखाती है इसीलिए यह अपनी सबसे बड़ी कमी को भी भूल गई।
कमियां हर किसी की ज़िंदगी में है। पर ज़िंदगी का असली मक़सद तो हर कमी से पार लगा कर खुश रहने का नाम है। 52 साल की उम्र में अपने पैरों पर खड़ा होना। अपने खुद के लिए सिर उठाकर कमाना, आत्मनिर्भर बनना अपने आप में एक मिसाल है। सिटी वुमन मैगज़ीन की तरफ से रीटा जी को दिल से सलाम।










