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कॉर्पोरेट जॉब से कलेक्टर ऑफिस तक: बिना कोचिंग यूपीएससी टॉप करने वाली श्वेता भारती की असली कहानी

अनुशासन, स्मार्ट स्टडी और दृढ़ संकल्प से बदली किस्मत

श्वेता भारती IAS – विप्रो से यूपीएससी 356 रैंक तक का प्रेरणादायक सफर

आज भी अधिकतर लोगों का मानना है कि आईएएस बनने के लिए सालों तक कोचिंग संस्थानों में रहकर केवल पढ़ाई करनी पड़ती है। लेकिन श्वेता भारती की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और योजना मजबूत, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

बिहार के नालंदा जिले के राजगीर बाजार की रहने वाली श्वेता भारती ने बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था। उनके पिता शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी मानते थे, जिसने श्वेता की सोच को मजबूत आधार दिया।

बी.टेक पूरा करने के बाद श्वेता ने आईटी सेक्टर में कदम रखा और विप्रो जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी शुरू की। लेकिन दिल के किसी कोने में देश सेवा का सपना लगातार जीवित रहा।

पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते श्वेता के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी करना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने एक कठिन लेकिन साहसी फैसला लिया—

फुल-टाइम जॉब के साथ UPSC की तैयारी

समय की कीमत समझते हुए श्वेता ने अपने आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपने लिए कई तरह के नियम बनाए।

  • दिन के 9 घंटे: नौकरी में प्रोफेशनल जिम्मेदारियाँ
  • सुबह-सुबह और देर रात: यूपीएससी की पढ़ाई
  • स्मार्टफोन का सीमित उपयोग किया
  • सोशल मीडिया से दूरी बनाई
  • गैर-ज़रूरी सामाजिक गतिविधियाँ छोड़ दीं

उनका मानना था कि कम समय में फोकस्ड स्टडी ही असली गेम-चेंजर है।

यूपीएससी से पहले श्वेता ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 64वीं और 65वीं परीक्षा उत्तीर्ण की। 65वीं BPSC में उन्होंने 65वीं रैंक हासिल की और पश्चिम चंपारण में जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य किया।यह अनुभव उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि प्रशासन को समझने की एक मजबूत पाठशाला था।

UPSC 2021: मेहनत का असली इनाम

साल 2021 में श्वेता भारती ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में AIR 356 हासिल कर लिया।
उनके अंक इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी तैयारी कितनी संतुलित थी । यह उनकी दूसरी कोशिश थी, जो यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, सीख होती है।

श्वेता भारती की कहानी लाखों उन युवाओं के लिए उम्मीद है जो नौकरी करते हैं, कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते या समय की कमी से जूझ रहे हैं, उनकी सफलता इस गलतफहमी को भी दूर करती है कि UPSC के लिए रोज़ 12–14 घंटे पढ़ना अनिवार्य है।

आज श्वेता भारती एक आईएएस अधिकारी हैं और बिहार के भागलपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।
अब वे उसी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जिसे बदलने का सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था। कॉर्पोरेट जॉब से कलेक्टर ऑफिस तक का सफर केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, अनुशासन और सही रणनीति की मिसाल है। श्वेता भारती हर कामकाजी पेशेवर और हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं जो परिस्थितियों को अपनी कमजोरी मान बैठते हैं। सही योजना और अटूट लगन से, आप भी अपनी सफलता की कहानी खुद लिख सकते हैं।

SOURCEसिटी विमेन मैगज़ीन रिसर्च डेस्क
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Editor-in-Chief and Founder of CityWomenMagazine.in