
मिलिए मध्यमवर्गीय मुस्लिम लड़की से, जो फिटनेस के लिए महिलाओं का सम्मान करने वाले इस्लामी रीति-रिवाजों के बीच बैलेंस बनाते हुए रूढ़ियों को तोड़ रही है, ताकि महिलाओं को अपराधियों की चुभती नज़रों से बचाया जा सके।
TOI में छपी इस खबर को पढ़े बिना में रह नहीं पाया। शायद आपको भी मोमिन हलीमा सादिया से जुडी ये खबर दिलचस्प लगे। इसलिए सोचा आपके साथ इस स्टोरी को शेयर किया जाए।
मुंबई के जोगेश्वरी वेस्ट में एक AC वाले जिम में पहली नज़र में कुछ भी अजीब नहीं लगता है, लेकिन अगर गौर से देखेंगे तो आप इस कॉलेज गर्ल और फिटनेस फ्रीक मोमिन हलीमा सादिया को, काले हिजाब में ट्रेडमिल पर पसीना बहाते हुये, ढीले ट्रैक सूट में देख सकते हैं।
सादिया ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पावरलिफ्टिंग और मार्शल आर्ट में सिल्वर और गोल्ड मैडल जीता है।
#Halima #Momin #Sadiya is an athlete from #Jogeshwari #Mumbai who performs calisthenics in #hijab
Do you know someone like her? Tell us such stories using #SheInspires #GirlPower #CWM #AzharKhan #MuslimGirl #Islam #Gym #Yoga #Female #Athle #Inspiration @citywomenmag pic.twitter.com/9uHv2YuQzE— Azhar Khan (@azhar3) October 15, 2021
इस “पावर-पैक” कैलिस्थेनिक्स (बॉडीवेट एक्सरसाइज) परफॉर्मर, फिटनेस ट्रेनर और मार्शल आर्ट एथलीट के इंस्टाग्राम पर लगभग 5770 (यह आर्टिकल लिखते समय) फॉलोअर्स हैं। उनके अकाउंट पोस्ट सादिया की फिटनेस के प्रति जागरूकता और पसंद को दिखता है साथ ही उनकी मानसिक शक्ति का प्रदर्शन भी है।
यह युवा लड़की हर साल 1 फरवरी को मुंबई में होने वाले विश्व हिजाब दिवस कार्यक्रम के कलाकारों में से एक है। जिसका आयोजन मुंबई शहर के एक गैर सरकारी संगठन अल हादी एनजीओ द्वारा किया जाता रहा है। इस आयोजन में यह दिखाया जाता है कि “हिजाब महिलाओं को सशक्त बनाता है और महिलाओं को किसी के अधीन नहीं करता”।
यह लड़की कई लोगों के साथ गहरी सामाजिक परंपराओं से लड़ रही है, जो फिटनेस के प्रति उसके जूनून को स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन इस्लाम में कहीं भी इसे प्रतिबंधित नहीं किया गया है या किसी महिला को फिट रहने से मना किया गया है। यह सब सामाजिक अनुमान और रूढ़िवादी परम्पराएं धर्म में लोगों की उनकी सीमित समझ के अनुसार हैं।
“मैं ऐसे बॉडी-बिल्डिंग शो में नहीं हूं, जहां पर बिकनी में अपने टोंड बाइसेप्स और एब्स को दिखाना पड़े। मैं ऐसे व्यायामों से जुडी हूं, जो शरीर को मजबूत करते हैं, इम्युनिटी को सही करते हैं और साथ में मन की एकाग्रता में सुधार करते हैं,” सादिया ने टीआईओ को दिए इंटरव्यू में कहा।
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सादिया की बड़ी बहन साइमा ने भी मार्शल आर्ट सिखने की कोशिश की थी, पर वह इसे जारी नहीं रख सकी क्योंकि उनके माता-पिता ने उनको समाज के डर से यह नहीं करने दिया। सादिया की बड़ी बहन को नौकरी छोड़कर शादी करनी पड़ी। लेकिन इन सबके बावजूद सादिया ने माता-पिता के इस फैसले के खिलाफ जाकर अपने जुनून को फॉलो किया। सादिया के पिता रियल एस्टेट बिजनेस में हैं और उनकी माँ एक रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं। उनके इस फैसले से अब वह खुश हैं और सादिया का समर्थन कर रहे हैं। सादिया इस हिजाबी में अपना सिर ऊंचा करके चलने के लिए कैलिस्थेनिक्स में ऑस्ट्रेलिया से एक सर्टिफिकेट कोर्स भी कर रही हैं।
आज वह जो कुछ भी हैं, इसके लिए सादिया अपने मार्शल आर्ट ट्रेनर मोहम्मद सरदार का शुक्रिया (धन्यवाद) करती हैं। उनके ट्रेनर ने उन्हें वास्तव में बहुत प्रोत्साहित किया और सिखाया कि उसे केवल अपने संकोच को छोड़ना होगा।
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