
जब दुनिया 2025 में युवाओं की नई परिभाषा गढ़ रही थी, तब मुंबई की 18 वर्षीय काम्या कार्तिकेयन बर्फ़ से ढके अंटार्कटिका में खुद को परख रही थीं। −30 डिग्री तापमान, तेज़ हवाएँ और अनंत सफ़ेद मैदान—इन सबके बीच काम्या ने 115 किलोमीटर स्की करते हुए साउथ पोल तक पहुँचकर इतिहास रच दिया। वह न सिर्फ़ सबसे कम उम्र की भारतीय, बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे युवा महिला बनीं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
जानते हैं काम्या कार्तिकेयन की इस बड़ी उपलब्धि और हौसले की पूरी कहानी
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साल 2025 में, जब ज़्यादातर युवा अपने भविष्य की योजनाओं में व्यस्त थे, मुंबई की 18 वर्षीय काम्या कार्तिकेयन दुनिया के सबसे ठंडे और कठिन स्थान—अंटार्कटिका—में अपने सपने की ओर बढ़ रही थीं।
−30 डिग्री सेल्सियस तापमान, तेज़ बर्फ़ीली हवाएँ और अनंत सफ़ेद मैदान—इन सबके बीच काम्या ने 115 किलोमीटर स्की करते हुए साउथ पोल तक पहुँचकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह सबसे कम उम्र की भारतीय और दुनिया की दूसरी सबसे युवा महिला बनीं, जिन्होंने यह कठिन कारनामा पूरा किया।
यह सिर्फ़ रिकॉर्ड नहीं था—यह हिम्मत, धैर्य और आत्मविश्वास की जीत थी।
उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है
काम्या की कहानी हमें सिखाती है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती। वह पिछले 10 वर्षों से पर्वतारोहण कर रही हैं और इससे पहले ही सेवन समिट्स चैलेंज पूरा कर चुकी थीं। लेकिन अंटार्कटिका अलग था। यहाँ कोई ढलान नहीं, कोई आराम नहीं—बस लगातार आगे बढ़ते रहना।
जब हार बिल्कुल सामने खड़ी थी
अभियान के तीसरे दिन, कोल्ड बर्न्स के कारण काम्या को वापस बुलाने की चर्चा होने लगी। रेस्क्यू की बात चल रही थी। डर ने मन को घेर लिया। लेकिन काम्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक दिन का समय माँगा—खुद को साबित करने के लिए। उस दिन उन्होंने पाँच घंटे तक बर्फ़ पर संघर्ष करते हुए चलना जारी रखा। दर्द के बावजूद, थकान के बावजूद—वह रुकी नहीं। यही पल उनकी जीत का आधार बना।
संघर्ष से बनी तैयारी
काम्या की सफलता के पीछे चमक नहीं, कड़ी मेहनत है।
- गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) में उन्होंने 40–50 किलो वज़न वाली स्लेज खींचकर घंटों अभ्यास किया
- दिल्ली में बर्फ़ न मिलने पर, उन्होंने कमर से हार्नेस बाँधकर ट्रैक्टर के टायर खींचकर ट्रेनिंग की
यह तैयारी दिखाती है कि असली जीत मैदान से पहले शुरू होती है।
अनुशासन की विरासत
भारतीय नौसेना अधिकारी की बेटी होने के नाते, काम्या के जीवन में अनुशासन और मानसिक मज़बूती बचपन से रही है। यही मूल्य अंटार्कटिका की बर्फ़ में उनके सबसे बड़े हथियार बने।
काम्या ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि – “यह उनके जीवन का सबसे कठिन अभियान था—लेकिन यही अनुभव उन्हें सबसे मज़बूत भी बना गया।”
2025 की प्रेरणा क्यों हैं काम्या कार्तिकेयन
काम्या कार्तिकेयन आज सिर्फ़ एक एथलीट नहीं हैं, बल्कि—
- भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा
- लड़कियों के लिए साहस की मिसाल
- और यह साबित करने वाली आवाज़ कि सीमाएँ तोड़ी जा सकती हैं
उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि ख़ामोशी से की गई मेहनत, इतिहास रचती है।
हर युवा के नाम संदेश
काम्या ने इंतज़ार नहीं किया कि वह “तैयार” हों। उन्होंने मेहनत की। डर का सामना किया।और 18 साल की उम्र में दुनिया के आख़िरी छोर तक पहुँच गईं।
2025 में काम्या कार्तिकेयन की यह कहानी सिर्फ़ उपलब्धि नहीं— यह विश्वास है कि उम्र नहीं, हौसला रास्ता तय करता है।
काम्या कार्तिकेयन की कहानी इंग्लिश में पढ़ने के लिए क्लिक करें










