
स्ट्रोक अब सिर्फ बूढ़े लोगों की एक आम बीमारी नहीं है क्योंकि यह 25 वर्ष से ऊपर के लोगों में अधिक आम हो रहा है। अन हैल्थी लाइफस्टाइल के कारण, यह युवाओं में भी आम हो रहा है। विश्व स्ट्रोक संगठन (WSO) के अनुसार, हर साल 13 मिलियन लोग स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं, और वह भी सालाना 5.5 मिलियन लोग इससे मर जाते हैं। इस बीच, भारत में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति को हार्ट स्ट्रोक का दौरा पड़ता है। डब्ल्यूएसओ ने 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस के रूप में घोषित किया है, ताकि स्ट्रोक की दर में तेजी से वृद्धि और स्वस्थ जीवन शैली की तलाश के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में आम लोगों के बीच में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
स्ट्रोक के कारण
लाइफस्टाइल में बदलाव आजकल हाई स्ट्रोक के मामलों का मुख्य कारण है। 10 साल पहले, स्ट्रोक का जोखिम 35 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में होता था। लेकिन जीवनशैली में बदलाव के कारण, 25 वर्ष से अधिक आयु के लोग लगभग 40 प्रतिशत स्ट्रोक से पीड़ित हैं। किसी व्यक्ति को स्ट्राइक अटैक का शिकार होने के सबसे सामान्य कारण तनाव, नींद की कमी, अधिक पैकेज्ड और जंक फूड खाना, शराब का सेवन, धूम्रपान आदि हैं। ये सभी युवाओं में हाई स्ट्रोक के मामलों के मुख्य कारण बनते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 53 फीसदी युवा हर दिन पैकेज्ड फूड का सेवन करते हैं। काम के बोझ और समय की कमी के कारण जंक फूड और पैकेज्ड फूड का सेवन बहुत आम है।
एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत को पैकेज्ड फूड पदार्थों के सेवन के लिए सबसे अस्वस्थ देशों में स्थान दिया गया है। युवा काम के दबाव और कम समय के कारण पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन करते हैं जो उनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं, एक रक्त का थक्का बनना और दूसरा मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण होता है।
एक मिनट जिंदगी बचा सकता है
स्ट्रोक अटैक आमतौर पर देर रात या जल्दी सुबह होता है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे की सामान्य बातें और उनकी शैली जानते हैं। जब ये सभी संकेत असामान्य हो जाते हैं तो यह एक है स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
हर मिनट कीमती है। इलाज में केवल एक मिनट की देरी किसी व्यक्ति के जीवन को काफी हद तक बर्बाद कर सकती है। जब कोई व्यक्ति 25 वर्ष की आयु पार कर लेता है, तो मस्तिष्क ने इन पिछले 20-25 वर्षों में जमा की गई जानकारी को प्रोसेस और स्टोर करता है। जब एक व्यक्ति को मामूली स्ट्रोक का दौरा पड़ता है, और अगर इसे पहले से पहचानाजाये तो याददास्त खोने की संभावना काफी कम हो सकती है। अगर किसी को स्ट्रोक होता है तो उसे जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना जल्दी ठीक होने का प्राथमिक तरीका है।
अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन के अनुसार, स्ट्रोक के संकेतों को बीई फास्ट के रूप में बताया गया है।
बी – बैलेंस – चलते समय संतुलन नहीं बना पाना।
ई – आंखें – यदि व्यक्ति को धुंधली दृष्टि, या दोहरी दृष्टि, या देखने में परेशानी होना शुरू हो गया है।
एफ – फेस ड्रोपिंग – चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगा हो या चेहरे के हाव-भाव में अचानक आए बदलाव को आप आसानी से पहचान सकते हैं।
ए – आर्म – कमजोरी बाहों का अचानक गिरना या सामान्य रूप से हिलने-डुलने में सक्षम न होना।
एस – आवाज – बोलने में कठिनाई, आवाज का सही से न आना, कुछ भी निगलने में परेशानी होने के लक्षण।
टी – टॉक – फ़ौरन इमरजेंसी नंबर पर संपर्क करें।
हालांकि अलग-अलग देशों में अलग-अलग इमरजेंसी नंबर होते हैं, लेकिन एक बार जब कोई व्यक्ति किसी भी लक्षण से पीड़ित होता है, तो बिना किसी देरी के अस्पताल जाने का समय आ जाता है।










