विश्व एड्स दिवस यानि की एक दिसबंर, पहले के मुकाबले अब इस बीमारी के लिए लोग अब ज्यादा अलर्ट रहते हैं। खासकर महिलाओं में एचआईवी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि इस बीमारी का 50 फीसदी हिस्सा महिलाओं में पाया जाता है। इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए 10 सालों से बदस्तूर जारी है।
अक्सर दुनिया की कोई बड़ी विपदा समाज में महिलाओं को सबसे ज़्यादा घात दे जाती हैं एचआईवी या एड्स उन्ंहीं में से एक है। महिलाओं में एचआईवी के बढ़ते मामलों और बचाव पर सिटी वुमन के साथ बातचीत की डॉक्टर चित्रा ने।
सवालः HIV एक बीमारी से ज्यादा एक खौफ बन गई है, क्यों
एचआईवी के बारे में जानकारी होना जरूरी है कि आखिरकार कैसे ये बीमारी होती है। टीवी पर कई सारे ऐड और प्रोग्राम के दिखाए जाते हैं, उन्हें देखना और समझना ज्यादा जरूरी है। इसके खौफ से बचने का एक ही उपाय है कि आप खुद बीमारी का पता तो लगाए ही साथ ही दूसरों को भी इसकी जानकारी दें।
सवालः इलाज से ज्यादा सावधानी ज्यादा जरूरी है, क्यों
डॉक्टर चित्रा कहती हैं कि 0.5 फीसदी मामलों में ही ये वायरस अनसेफ सेक्स के कारण फैलता है। ज्यादातर केस में ब्लड ट्रान्सफ्यूशन करना इसकी मूल वजह होता है। ब्लड ट्रान्सफ्यूशन करने के मामलों में टेस्ट तो होता है, उसे ट्रिपल टेस्ट कहते है। जब बॉडी में एंटी बॉडी में नहीं बनता है तो कुछ वक्त इस बीमारी के होने के चांस ज्यादा रहता है।
वुमन क्यों है ज्यादा मामले
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ये बीमारी इसलिए ज्यादा पनपती है क्योंकि उनका शरीर कहीं ना कहीं कमजोर है। संबंध बनाते वक्त या फिर अन्य क्रियाओं के वक्त महिलाओं के शरीर की कुछ कोशिकाएं अंदर से टूट जाती है, जिसके कारण वायरस फैलने के चांस ज्यादा रहते हैं। कई बार महिलाओं को इस बीमारी के बारे में उस वक्त पता चलता है जब बीमारी आखिरी स्टेज पर पहुंच चुकी होती है।