
कहते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं की सेहत का विशेष ध्यान दिया जाता है, उनके खान पान से लेकर उनके सुख-सुविधाओं पर भी खासा नजर रखी जाती है, ताकि आने वाला शिशु स्वस्थ पैदा हो, लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व भर में हर 100 प्रग्नेंट महिलाओं में से 9 महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान ‘जैस्टेशनल डायबिटीज’ की शिकायत पायी जाती है।
जैस्टेशनल डायबिटीज तब होता है, जब प्रेग्नेंसी के दौरान प्रग्नेंट महिला के खून में शर्करा (ग्लूकोस) की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है। खून में अत्याधिक ग्लूकोस के होने से प्रग्नेंट महिला और उसके शिशु दोनो के लिए समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान ‘जैस्टेशनल डायबिटीज’ एक तनावपूर्ण और समस्याग्रस्त मामला है क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी या प्रसव के बाद चिकित्सा में जटिलताएं बढ़ जाती हैं। जैस्टेशनल डायबिटीज आने वाले शिशु के लिए भी खतरनाक साबित होती है।
क्या है वजह
अगर किसी प्रग्नेंट महिला का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या इससे अधिक है तो उसको जैस्टेशनल डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा बनी रहती हैं। साथ ही अगर किसी महिला का पहला बच्चा 4.5 किलो या इससे अधिक वजन का था तो ये वजह भी जैस्टेशनल डायबिटीज का कारण साबित हो सकता है। कुछ लोगो में मधुमेह होने का खतरा ज्यादा होता है, और दुर्भाग्यवश दक्षिण एशियाई लोग उनमें से एक हैं। यदि आपके परिवार में डायबिटीज या फिर जैस्टेशनल डायबिटीज होने का इतिहास रहा है, तो आपको भी इसके होने की संभावना अधिक रहती है।
शिशु पर प्रभाव
अगर आप जैस्टेशनल डायबिटीज से ग्रस्त हैं और आपके खून में ग्लूकोस की मात्रा ज्यादा है, तो ये प्लेसेंटा से होते हुए आपके शिशु के शरीर तक पहुंच जाएगी जिसकी वजह से आपके आने वाले शिशु का वजन बढ़ सकता है। प्लेसेंटा उस अंग को कहते है जिसके द्वारा गर्भाशय में स्थित भ्रूण के शरीर में माता के रक्त का पोषण पहुंचता रहता है और जिससे भ्रूण की वृद्धि होती है। शिशु का बढ़ा हुआ वजन प्रसव और जन्म के दौरान मुश्किलें पैदा कर सकता है और ये मृत शिशु के जन्म का भी कारण बन सकता है।
क्या है उपाय
जैस्टेशनल डायबिटीज से ग्रस्त प्रग्नेंट महिलाओं को संतुलित भोजन करना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे। ऐसे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमें सुगर या स्टार्च की मात्रा अधिक हो। डॉक्टर का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को हमेशा जंक फूड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही ज्यादा तीखा या तला भोजन भी नहीं करना चाहिए। जूस, मीठी चाय, सोडा, एडिड शुगर जैसे पेय को लेना भी घातक सिद्ध हो सकता है।
डॉक्टर के अनुसार
डॉक्टर के अनुसार जैस्टेशनल डायबिटीज में शुगर और कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों से बिल्कुल दूरी बनाकर रखने चाहिए, लेकिन लो-फैट दूध लेना जैस्टेशनल डायबिटीज में एक अच्छा विकल्प माना जाता है। कुछ महिलाएं व्रत में दवाएं नहीं लेती, जो कि हानिकारक होता है। अगर आपको डायबिटीज है या फिर आप प्रग्नेंट हैं, तो अपनी दवाएं समय से लेती रहें। दवाएं ना लेने से आपके स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ सकता है।










