
वजन घटाना…ये शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? शायद कोई नई डाइट, घंटों की एक्सरसाइज़ या फिर कोई जादू की गोली! पर रुकिए, क्या कभी हमने सोचा है कि ये सब सिर्फ बाहरी बदलाव हैं? असली खेल तो हमारे भीतर चल रहा होता है। जी हां, मैं बात कर रही हूं आपके “व्यवहार” और “भोजन के साथ आपके रिश्ते” की।
1. अपना व्यवहार बदलें, भोजन से रिश्ता सुधारें
वजन घटाने की शुरुआत अपने व्यवहार से होती है। खाने की आदतें, टाइमिंग, और फूड चॉइस — इन सब पर ध्यान देना जरूरी है। खुद को समझना और धीरे-धीरे हेल्दी पैटर्न अपनाना ही स्थायी वेट लॉस की कुंजी है।
2. इंटरमिटेंट फास्टिंग और अन्य तरीके
हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए हर किसी के लिए एक ही तरीका काम नहीं करता।
- कुछ लोग 16 घंटे फास्टिंग और 8 घंटे ईटिंग विंडो अपनाते हैं।
- कुछ लोग हफ्ते में 5 दिन फास्टिंग करते हैं।
- कुछ लोग कीटो डाइट या अन्य कैलोरी डेफिसिट डाइट्स** अपनाते हैं।
इन सभी का उद्देश्य एक ही है — शरीर को कैलोरी डेफिसिट स्टेटस में लाना, यानी जितनी कैलोरी ली जाए उससे ज्यादा खर्च करना।
3. कैलोरी डेफिसिट बनाम क्रैश डाइटिंग
कैलोरी डेफिसिट और क्रैश डाइटिंग में बड़ा अंतर है।
- कैलोरी डेफिसिट का मतलब है धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से कैलोरी कम करना।
- क्रैश डाइटिंग में अचानक बहुत कम खाना शुरू कर देना शामिल है, जो शरीर के लिए हानिकारक है।
बहुत तेजी से वजन घटाना, जैसे 10 दिनों में 10 किलो, न केवल अस्थायी होता है बल्कि वजन वापस बढ़ने की संभावना भी ज्यादा होती है। कई बार ऐसा होता है कि घटाया हुआ वजन दोगुना वापस आ जाता है।
4. हेल्दी वेट लॉस का सही तरीका
अगर वजन घटाना जरूरी है, खासकर ओबीस कैटेगरी के लोगों के लिए, तो यह काम एक क्वालिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह से करना चाहिए।
- डाइट में सभी न्यूट्रिशनल कंपोनेंट्स शामिल होने चाहिए।
- साथ ही, कैलोरी डेफिसिट बनाए रखना जरूरी है।
- बिहेवियरल इंटरमिटेंट फास्टिंग और संतुलित डाइट प्लान लंबे समय तक टिकाऊ परिणाम देते हैं।
वजन घटाने का लक्ष्य केवल स्केल पर नंबर कम करना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक हेल्दी और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाना होना चाहिए। धीरे-धीरे किए गए बदलाव ही लंबे समय तक असर दिखाते हैं और शरीर को स्वस्थ रखते हैं।










