Home Health #MothersDay – इस मदर्स डे माँ की सेहत को दें प्राथमिकता

#MothersDay – इस मदर्स डे माँ की सेहत को दें प्राथमिकता

This Mother’s Day Make Her Health a Top Priority
This Mother’s Day Make Her Health a Top Priority

बच्‍चे के जन्‍म लेने से लेकर सालों साल परिवार का ख्‍याल रखने की जिम्‍मेदारियों के बीच भागती-दौड़ती मांएं सुपरहीरोज़ होती हैं। सबकी उम्‍मीदों पर खरा उतरने के लिये वह सिर्फ अपना आराम ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत भी कुर्बान कर देती हैं। क्‍या आपको पता है कि 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय महिलाएं घुटने और बोन मास का डिजनरेशन होने की समस्‍या का अनुभव करने लगती हैं ? भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस के जल्‍दी होने की वजह पोषक तत्‍वों की कमी, और मोटापा है।

इस मदर्स डे अपनी मॉम को अच्‍छी सेहत का तोहफा दें और उन्हें इस बात का अहसास दिलाए कि वह उन  महिलाओ में शामिल नहीं हैं जोकि जोड़ों के क्रॉनिक दर्द से ग्रसित होती हैं, उन्‍हें डॉ. रमनीक महाजन, डायरेक्‍टर -ऑर्थोपेडिक्‍स, मैक्‍स हॉस्पिटल, साकेत, ने परिवारों को निम्‍नलिखित बातों को  ध्यान में रखने की सलाह दी है ताकि मदर्स को जोड़ों के दर्द से बिलकुल दूर रखा जा सके :

जल्‍द पहचान करें चेतावनी संकेत :  आपने कई बार अपनी माँ को जोड़ों के दर्द, अकड़न को लेकर शिकायत करते हुए और फिर उम्र बढ़ने का संकेत मानकर इसे नजरअंदाज करते हुए देखा होगा ? संभवत: समय आ गया है कि असली कारण को जानने के लिए आप विशेषज्ञ से विचारविमर्श करें। घुटनों में सुबह-सुबह दर्द, अकड़न, लॉकिंग एवं पॉपिंग से शुरुआत होने से लेकर जोड़ों में सूजन होने तक, यह आर्थराइटिस के संकेत हो सकते हैं जोकि एक प्रगतिशील ज्‍वाइंट स्थिति है। और अधिकतर भारतीय महिलाएं   इन  संकेतों  को   नजरअंदाज करती हैं।

उचित चिकित्‍सा ध्‍यान  : सही समय पर पहचान होना और उपचार मिलना आपकी मॉम को लंबे समय तक एक अच्‍छी जिंदगी जीने में मदद कर सकता है। अपने अनुभव की बात करूं तो मैंने देखा है कि महिलाएं तभी डॉक्‍टर के पास जाती हैं जब यह स्थिति ऐसे स्‍टेज में पहुंच जाती है जब दर्द असहनीय हो जाता है। याद रखें कि देरी होने से जोड़ों को होने वाला नुकसान कई गुणा बढ़ सकता है। यदि इसका शुरुआती चरणों में इलाज हो जाए,तो पारंपरिक उपचारों की मदद से इस स्थिति को बढ़ने में विलंब किया जा सकता है।

उनके वजन पर रखें नजर : ओवरवेट होना भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस होने के सबसे प्रमुख जोखिम घटकों में से एक है। हमारे जोड़ कुछ हद तक वजन उठाने के लिये डिजाइन हैं। प्रत्‍येक 1 किलो अतिरिक्‍त वजन घुटनों पर चार गुना दबाव डाल सकता है। क्षमता से अधिक वजन जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए उचित वजन का मतलब है स्‍वस्‍थ जोड़।

हेल्‍थ क्‍लब की सदस्‍यता तोहफे में दें : वह अपने परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य की पूरी देखभाल करती है पर खुद के स्‍वास्‍थ्‍य को नजरअंदाज कर देती है। इस मदर्स डे उसके स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल करने की जिम्‍मेदारी लें और उनका नामांकन योगा, जुंबा या एरोबिक्‍स क्‍लास में कराएं। शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ रहकर अतिरिक्‍त वजन की समस्‍या से दूर रहेंगे और जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होंगी। इसके बदले में दर्द में राहत मिलेगी और जोड़ों की गतिशीलता सुधरेगी। हर दिन 30 मिनट की वॉक उनकी हड्डियों एवं जोड़ों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभदायक हो सकती है।

छोटी-मोटी चोटों को गंभीरता से लें : हम जोड़ों के आसपास लगी छोटी-मोटी चोटों को अक्‍सर नजरअंदाज कर देते हैं। इससे हानिकारक स्थितियां पैदा हो सकती हैं। जैसे भविष्‍य में आर्थराइटिस हो सकता है। यदि दर्द बार-बार हो रहा है तो विशेषज्ञ की सलाह लें। हम अक्‍सर ऐसे मरीजों को देखते हैं जहां ज्‍वाइंट इंजरी ज्‍वाइंट डिजनरेशन का कारण बन जाती हैं।

उनके शरीर के पॉश्‍चर पर रखें नजर : गलत पॉश्‍चर से जोड़ों, खासतौर से घुटने पर अतिरिक्‍त बोझ पड़ता है। घुटने शरीर में सबसे अधिक भार सहन करने वाले जोड़ हैं। इससे घुटने में दर्द हो सकता है। सही पॉश्‍चर रखना, काम के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना, नियमित रूप से स्‍ट्रेचिंग करना और अपने पॉश्‍चर को बीच-बीच में ठीक करने से घुटने के दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

पेनकिलर्स को कहें “ना” : हमारे देश में खुद से दवाएं लेना एक आम समस्‍या है। आमतौर पर, हम अक्‍सर शरीर में दर्द होने पर डॉक्‍टर से सलाह लिए बिना पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं। पेनकिलर्स भले ही हमें दर्द से फौरन राहत दिलाते हैं पर, वह स्थिति का उपचार नहीं करते। इससे कई को-मॉर्बिड स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए यदि आप अपनी मॉम को जोड़ों के दर्द के लिए खुद से पेनकिलर्स लेते हुए देखें, तो फौरन ऑर्थोपेडिस्‍ट के पास जाकर उनका परीक्षण कराएं।

यदि आपकी मां में आर्थराइटिस डायग्‍नोस होता है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। ऑर्थोपेडिक्‍स के क्षेत्र में हुई प्रगति ने इस स्थिति के इलाज में क्रांति ला दी है। पारंपरिक उपचार विकल्‍पों जैसेकि पेनकिलर्स, शारीरिक गतिविधि, जीवनशैली में बदलाव, स्‍टेरॉयड इंजेक्‍शन से लेकर मिनिमल इनवेसिव प्रोसीजर एवं जोड़ प्रत्‍यारोपण थेरैपी जैसे सुरक्षित एवं प्रभावी सर्जिकल हस्‍तक्षेपों तक, वर्तमान में आर्थराइटिस का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

रिप्‍लेसमेंट थेरैपी की सलाह तभी दी जाती है जब पारंपरिक उपचार दर्द से राहत दिलाने और आपके जीवन की गुणवत्‍ता को सुधारने में विफल होते हैं। यह एक बेहद सुरक्षित और व्‍यापकता से प्रयोग की जाने वाली थेरैपी है और घुटने के दर्द को रोकने के लिए और बिना रूकावट काम करने के लिए  प्रबंधित करने एवं मोबिलिटी को बहाल करने में बेहद प्रभावी है।

एक माँ परिवार की रीढ़ होती हैं और इन्‍हें अपनी भूमिका बखूबी निभाने के लिये एक मजबूत आधार की जरूरत होती है। इसलिए अब वक्‍त आ गया है कि उनकी सेहत को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाए।

 

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