
PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) और PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिज़ीज) महिलाओं में होने वाली आम हार्मोनल समस्याएं हैं, जो मुख्य रूप से 15 से 45 वर्ष की उम्र की महिलाओं को प्रभावित करती हैं। इन स्थितियों में हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड्स अनियमित होना, वजन बढ़ना, त्वचा से जुड़ी समस्याएं और गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। आज के समय में PCOS/PCOD को महिलाओं में होने वाली एक बड़ी लाइफस्टाइल से जुड़ी हार्मोनल समस्या माना जाता है।
PCOS और PCOD में क्या अंतर है?
PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिज़ीज)
- हल्की से मध्यम गंभीरता की समस्या
- मुख्य कारण: लाइफस्टाइल और हार्मोनल असंतुलन
- अंडोत्सर्जन (Ovulation) अनियमित
- फर्टिलिटी आमतौर पर मैनेज की जा सकती है
PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)
- ज्यादा गंभीर और जटिल स्थिति
- कारण: जेनेटिक, मेटाबॉलिक और हार्मोनल गड़बड़ी
- पीरियड्स, वजन, त्वचा और मेटाबॉलिज़्म को प्रभावित करता है
- इलाज न होने पर बांझपन का कारण बन सकता है
PCOS, PCOD से ज्यादा गंभीर होता है, हालांकि अक्सर दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक-दूसरे के लिए किया जाता है।
PCOS और PCOD के सामान्य लक्षण
पीरियड्स से जुड़े लक्षण
- पीरियड्स का अनियमित होना
- पीरियड्स का न आना
- ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग
शारीरिक लक्षण
- वजन बढ़ना (खासकर पेट के आसपास)
- मुंहासे और तैलीय त्वचा
- चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल
- बालों का झड़ना या पतला होना
- मेटाबॉलिक और मानसिक लक्षण
- थकान
- मूड स्विंग्स
- चिंता या डिप्रेशन
- मीठा खाने की ज्यादा इच्छा
प्रजनन से जुड़े लक्षण
- गर्भधारण में कठिनाई
- ओवुलेशन में देरी
- बार-बार गर्भपात
PCOS और PCOD के मुख्य कारण
- हार्मोनल असंतुलन (एंड्रोजन हार्मोन का बढ़ना)
- इंसुलिन रेजिस्टेंस
- जेनेटिक कारण
- खराब लाइफस्टाइल
- मोटापा और वजन बढ़ना
- लगातार तनाव
PCOS और PCOD – जांच
- पीरियड्स का मेडिकल इतिहास और शारीरिक जांच
- ब्लड टेस्ट (LH, FSH, इंसुलिन, ब्लड शुगर, थायरॉयड)
- पेल्विक अल्ट्रासाउंड
लंबे समय तक होने वाले खतरे – अगर PCOS/PCOD का इलाज न किया जाए तो ये समस्याएं हो सकती हैं:
- टाइप 2 डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी
- बांझपन
- एंडोमेट्रियल कैंसर
- डिप्रेशन और एंग्जायटी
डॉक्टर से कब मिलें? – अगर आपको ये लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें:
- 3 महीने से ज्यादा समय तक पीरियड्स अनियमित
- ज्यादा बाल या मुंहासों की समस्या
- गर्भधारण में परेशानी
- तेजी से वजन बढ़ना
- मानसिक तनाव या उदासी
PCOS/PCOD का इलाज और मैनेजमेंट
इसका स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।
- लाइफस्टाइल मैनेजमेंट (सबसे जरूरी)
- रोज़ 30–45 मिनट एक्सरसाइज
- लो-GI और संतुलित आहार
- वजन नियंत्रित रखना
- योग और मेडिटेशन से तनाव कम करना
- 7–8 घंटे की पूरी नींद
- मेडिकल ट्रीटमेंट
PCOS/PCOD में किन चीज़ों से बचें
- ज्यादा मीठा और शुगर ड्रिंक्स
- मैदा, सफेद ब्रेड और सफेद चावल
- जंक और तला-भुना खाना
- ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड
- ज्यादा डेयरी (कुछ महिलाओं में मुंहासे बढ़ा सकती है)
मिथक और सच्चाई
मिथक: PCOS से कभी प्रेग्नेंसी नहीं होती
सच्चाई: सही इलाज से कई महिलाएं माँ बनती हैंमिथक: सिर्फ मोटी महिलाओं को PCOS होता है
सच्चाई: दुबली महिलाओं को भी PCOS हो सकता हैमिथक: PCOS में सर्जरी जरूरी है
सच्चाई: सर्जरी बहुत कम मामलों में होती हैमिथक: PCOS पूरी तरह ठीक हो सकता है
सच्चाई: इसे मैनेज किया जा सकता है, ठीक नहीं
हार्मोनल हेल्थ के लिए जरूरी टिप्स
- पीरियड्स ट्रैक करें
- क्रैश डाइट से बचें
- शुगर कम लें
- नियमित हेल्थ चेक-अप कराएं
- सेहत पर खुलकर बात करें
इनसाइट रिसर्च
PCOS और PCOD हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्याओं का एक समूह हैं, जिनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस और ओवरी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। शोध से पता चलता है कि लाइफस्टाइल और डाइट में सुधार से लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और लंबी अवधि में बेहतर स्वास्थ्य पाया जा सकता है।










