Home Health एंडोमेट्रियोसिस – भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं हैं इससे पीड़ित

एंडोमेट्रियोसिस – भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं हैं इससे पीड़ित

एंडोमेट्रियोसिस – भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं हैं इससे पीड़ित
एंडोमेट्रियोसिस – भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं हैं इससे पीड़ित
Ashu Das
“मुझे भयंकर दर्द हो रहा है, सहन नहीं हो रहा है मां बेहोश होने की हालात हो गई है। चक्कर आ रहे हैं, उल्टी जैसे फील हो रहा है।” पहली बार पीरियड्स आने पर हर लड़की को इसी तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है। बेटी मां के पास पहुंचकर ये सब कह ही रही होती है कि तभी मां बड़े प्यार से बोलती है, सुनो आज से 4 दिन तक आचार का डिब्बा मत छूना नहीं तो सारा आचार खराब हो जाएगा। नींबू तो छूना भी मत।
पीरियड्स के दौरान आंतों में सूजन, दर्द, उल्टी आने के बाद मन को बहलाने के लिए मां अक्सर कह दिया करती है कि ये दर्द तो बस शुरुआत है, जब खुद प्रेग्नेंट होगी तब असली दर्द का पता चलेगा। नौ महीने कितनी पीड़ा के साथ गुजारने पड़ते हैं, उसके आगे तुमको ये दर्द फीका लगेगा।
मां ये बात तो कह देती है लेकिन बेटी को दर्द किस कारण हो रहा है इसकी असली वजह का पता लगाना सही नहीं समझती है, मां को दर्द का एहसास तो है पर वो समझती है कि जो उसके साथ हुआ वही उसकी बेटी के साथ हो रहा है। इंटरनेट के जमाने में हम भारतीय आज भी पीरिड्स को लेकर होने वाली बिमारियों की जानकारी से बेहद अछूते हैं,
एंडोमेट्रियोसिस पीरियड्स से जुड़ी वो समस्या है, जिसके बारे में हममे से किसी को जानकारी ही नहीं है। ‘एंडोमेट्रियोसिस सोसायटी ऑफ़ इंडिया’ के मुताबिक़ भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं इससे पीड़ित हैं।
क्या है एंडोमेट्रियोसिस ?
युवा लड़कियों में बढ़ रही इस बीमारी में गर्भाशय के आस-पास की कोशिकाएं और ऊतक (टिशू) शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाते हैं, एक वक्त ऐसा आता है जब ये अंडाशय, फ़ैलोपियन ट्यूब, यूरीनरी ब्लैडर में या पेट के अंदर किसी भी जगह अपना घर बना लेते हैं। यह लंबे वक़्त तक रहने वाली बीमारी है जो मरीज को शारीरिक और मानसिक तौर पर तोड़कर रख देती है।
भारत में पीरिड्यस को लेकर एक बहुत बड़ा मिथक है कि जिन लड़कियों को मासिक अवसाद होने लगे वो मां जरूर बनेगी लेकिन ये धारणा बेहद ही गलत है। अगर कोई लड़की एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही है तो उसके मां बनने के चांस बेहद कम रह जाते हैं।
क्या हैं लक्षण?
1. अनियमित मासिक धर्म (पीरियड्स)
2. मासिक धर्म (पीरियड्स)के दौरान असामान्य रूप से ज़्यादा ब्लीडिंग और दर्द
3. पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिनों पहले ब्रैस्ट में सूजन और दर्द
4. यूरिन इंफेक्शन
5. सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद दर्द
6. पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द
7. थकान, चिड़चिड़ापन और कमज़ोरी
कैसे करें देखभाल
पीरियड्स के दौरान दर्द होना एक सामान्य बात है लेकिन ज्यादा दर्द होने पर कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर को दिखाएं। एक-दो दिन शरीर को आराम दें, हल्का गुनगुना पानी पिएं। डॉक्टर से सलाह लेते वक्त ध्यान रखें कि मेडिसन का सेवन ज्यादा मात्रा में ना करें।
मानसिक साथ है जरूरी
इस समस्या से जूझने के बाद अक्सर लड़कियां मानसिक तनाव में आ जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि मां, बुआ, चाची बड़ी या छोटी बहन उससे बात करें, ताकि दिमाग पर पड़ने वाले प्रेशर को कम किया जा सके। कई बार पिता, भाई को भी आगे आकर अपनी बहन या बेटी की इस समस्या के बारे में जानने और बात करने की कोशिश करनी चाहिए।
Previous articleपेट्रोलियम जेली के 10 अदभुत फायदे
Next articleनेशनल एपिलेप्सी डे