हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट ये दोनों ही कंडिशन एक दूसरे से बहुत अलग है।
हार्ट अटैक में, जब हार्ट मसल्स में ब्लड की सप्लाई किसी वजह से ठीक से नहीं हो पाती है पर हार्ट व्यक्ति के शरीर के दूसरे पार्टस को ब्लड की सप्लाई करता रहता है। इस स्थिति में व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ता है।
जबकि कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अचानक से व्यक्ति के शरीर में ठीक ब्लड पंप करना नहीं कर पाता है। इससे शरीर में ब्लड ठीक से सर्कुलेट न होने की वजह से बाॅडी पार्ट्स काम करना बंद कर देते हैं।
कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है।
उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है या फिर सांस लेना बंद कर देता है। ऐसे में अगर व्यक्ति का सही समय पर इलाज न किया जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है।
किन लोगों में होती है कार्डियक अरेस्ट की अधिक संभवना
कार्डियक अरेस्ट की उन लागों में ज्यादा संभावना रहती है जिन्हें पहले हार्ट अटैक पड़ चुका हो।
डाॅक्टर्स की माने तो 30 दिन से पहले ही मिलने लग जाते हैं हार्ट के रोगों के संकेत । समय रहते मुमकिन है इनका इलाज ।
क्या हैं संकेत
लेफ्ट साइड की पस्लियों के आसपास या सीने के बीचों बीच अचानक से दर्द होना और कुछ देर बाद अपने आप दर्द का ठीक हो जाना कार्डियक अरेस्ट का संकेत।
सीने में दबाव या भार महसूस होना।
अचानक से हार्टबीट तेज़ हो जाना।
अचानक से पसीना आना, गर्मी लगना और घबराहट होना
सांस लेने में तकलीफ होना या नाॅर्मल तरीके से सांस ना ले पाना।
कमजोरी महसूस करना या कुछ हल्के-फुल्के काम से भी थकान महसूस होना।
बिना किसी वजह सिर में या पेट में उपर कि तरफ दर्द होना,
पीठ या बांये हाथ, गर्दन या दांत में दर्द होना।
उल्टी आना या उल्टी आने जैसे महसूस करना या इनडाइजेशन जैसा फील होना।