Ishika Taneja, Hollywood Returns,
Beauty Expert & Executive Director of
Alps Cosmetic Clinic
30 साल की उम्र में त्वचा का निखार यूं ही जवां बनाये रखने के लिए ये जरूरी है कि आप अपनी स्किन को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाकर रखें। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर व एल्पस कॉस्मेटिक क्लीनिक की एक्ज़ीक्यूटिव डॉयरेक्टर इशिका तनेजा बता रही हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें इस्तेमाल करके आप अपनी स्किन को 30 की उम्र में एजिंग फैक्टर से बचा सकती हैं।
रेटिनॉल
यह विटामिन.ए से उत्पन्न होने वाला पदार्थ है जो कि त्वचा की भीतरी सतह में पाए जाने वाले कोलाजन की बनने की प्रक्रिया को बढ़ाता है जिससे फाइन लाइन्स और ओपन पोर्स कम नज़र आते हैं।
ए एच ए
इनसे एक्सफोलिएशन की प्रक्रिया बढ़ती है तथा नए सेल्स बनने की प्रक्रिया तेज होती है जिससे स्किन रिजेनरेट होती है।
एंटी-ऑक्सीडेंट
उम्र के साथ होने वाली एजिंग की प्रक्रिया में फ्री रेडिकल्स कुछ हद तक जिम्मेदार होते हैं। दरअसल ये हमारे शरीर में होने वाली कई प्रक्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले बाई.प्रोडक्ट्स होते हैं। कुछ क्रीमों में ग्रीन टीए विटामिन.ई आदि एंटी.ऑक्सीडेंट प्रोडक्ट पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले सेल डैमेज को कम करते हैं तथा परिणाम स्वरूप उस डैमेज से होनी वाली एजिंग की क्रिया को भी कम करते हैं।
एस.पी.एफ यानि सन प्रोटेक्शन फैक्टर
सूर्य की हानिकारक किरणों में उपस्थित यूण्वीण्ए हमारी त्वचा में झुर्रियांए ब्राउन स्पॉट्स आदि एजिंग के साइन्स को उत्पन्न करते हैं। अतः धूप में निकलने से पहले यदि हम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं तो अल्ट्रा वॉयलेट किरणों के दुष्परिणामों से कुछ हद तक बचा जा सकता है।
विटामिन सी
ये हमारी शरीर के इम्यून सिस्टम को इंप्रूव करता है और डैमेज सेल्स को रिपेयर करके एजिंग प्रक्रिया को बढ़ने से रोकता है।
ऑल्मण्ड ऑयल
ये एक नॉरीशिंग और मॉयश्चराइजिंग एजेंट है जो स्किन के लिए पोषण व पानी दोनों का कार्य करता है साथ ही स्किन पर बढ़ती उम्र को रोकने में मदद करता है।